Bilaspur High Court:  छत्तीसगढ़ के Bilaspur से एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है, जहां Chhattisgarh High Court ने स्पष्ट किया है कि नगर पालिका के किसी कर्मचारी को सीधे नगर निगम में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। जस्टिस P. P. Sahu की एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ राज्य सरकार के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला, क्यों पहुंचा विवाद कोर्ट तक

यह मामला कुम्हारी नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी नेतराम चंद्राकर से जुड़ा है, जिनका तबादला राज्य सरकार ने रायपुर नगर निगम में जोन कमिश्नर के पद पर कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।याचिका में कहा गया कि नगर पालिका और नगर निगम दो अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां हैं और इनके लिए अलग कानून लागू होते हैं। ऐसे में सीधे ट्रांसफर करना नियमों के खिलाफ है।

कानूनी दलीलें: अलग-अलग अधिनियम, अलग अधिकार

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि Chhattisgarh Municipalities Act, 1961 की धारा 86 (4) के तहत राज्य सरकार को केवल एक नगर पालिका से दूसरी नगर पालिका में ट्रांसफर का अधिकार है। वहीं Chhattisgarh Municipal Corporation Act, 1956 की धारा 58 (5) के अनुसार नगर निगम के कर्मचारियों का स्थानांतरण केवल एक निगम से दूसरे निगम में ही किया जा सकता है।

अदालत में यह भी बताया गया कि यदि किसी नगरपालिका कर्मचारी को नगर निगम में पदस्थ करना हो, तो वह केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से संभव है, ट्रांसफर के जरिए नहीं।

राज्य सरकार का पक्ष भी सुना, लेकिन कोर्ट नहीं हुआ सहमत

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि ट्रांसफर सेवा का सामान्य हिस्सा है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।हालांकि कोर्ट ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना और पाया कि संबंधित कानूनों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जो नगरपालिका कर्मचारी को निगम में ट्रांसफर की अनुमति देती हो।

कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी: नियमों के बाहर जाकर नहीं हो सकता ट्रांसफर

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि दोनों अधिनियमों में स्पष्ट रूप से अलग-अलग संस्थाओं के लिए अलग ट्रांसफर प्रावधान हैं। किसी भी कानून में यह नहीं लिखा है कि नगर पालिका कर्मचारी को नगर निगम में स्थानांतरित किया जा सकता है।कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता पहले रायपुर नगर निगम में कार्यरत था, लेकिन वह प्रतिनियुक्ति के आधार पर था, न कि ट्रांसफर से।

अंतिम निर्णय: 26 दिसंबर 2024 का आदेश पूरी तरह रद्द

सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने 26 दिसंबर 2024 के ट्रांसफर आदेश को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आधार का हवाला देकर भी इस तरह का स्थानांतरण वैध नहीं ठहराया जा सकता।

फैसले के दूरगामी असर, प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा प्रभाव

इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि नियमों और कानूनों के दायरे में रहकर ही कर्मचारियों के तबादले किए जा सकते हैं, अन्यथा न्यायिक हस्तक्षेप तय है।

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