मध्य प्रदेश : में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि MBBS सीटों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

इस पहल से जहां ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होंगी, वहीं मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।


मंडला में 150 MBBS सीटों वाला मेडिकल कॉलेज

जनजातीय बहुल मंडला जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से जारी है। यहां 2027-28 से शैक्षणिक सत्र शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
इस कॉलेज के लिए 150 MBBS सीटों की मंजूरी दी गई है, जिससे क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को मजबूती मिलेगी।


राजगढ़ में भी 150 सीटों की मंजूरी

राजगढ़ जिले में बन रहे मेडिकल कॉलेज में भी 150 MBBS सीटें स्वीकृत की गई हैं।
निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे के लिए अहम प्रोजेक्ट माना जा रहा है।


शिवपुरी में 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज

शिवपुरी जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है।
यहां 100 MBBS सीटों की मंजूरी दी गई है। इस कॉलेज के शुरू होने के बाद खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा।


नीमच में जल्द शुरू होगा नया मेडिकल कॉलेज

नीमच जिले में भी मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
यहां 100 MBBS सीटों को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही यह संस्थान स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।


धार में PPP मॉडल पर बड़ा प्रोजेक्ट

धार जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत किया जा रहा है।
करीब 25 एकड़ जमीन पर लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत से यह प्रोजेक्ट विकसित हो रहा है।
इसके शुरू होने के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।


पन्ना को भी मिला मेडिकल कॉलेज का तोहफा

पन्ना जिले में भी 100 MBBS सीटों वाला मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर आधारित है। इसके बनने से स्थानीय लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा बड़ा बदलाव

इन 6 जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विस्तार होगा। इससे एक ओर जहां डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं आम जनता को बेहतर इलाज और सुविधाएं अपने ही जिले में मिल सकेंगी।

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