

अंबिकापुर: होली क्रॉस वीमेन्स कॉलेज, अंबिकापुर में “21वीं सदी में भारतीय ज्ञान परंपरा : अंतर्विषयी परिप्रेक्ष्य” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ 10 अप्रैल को हुआ। यह सेमिनार कोल इंडिया, एसईसीएल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के प्रायोजक तथा महाविद्यालय के आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय को NAAC द्वारा ‘A’ ग्रेड से मान्यता प्राप्त है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर छात्रा आयुषी खाखा एवं उनके समूह द्वारा स्वागत गीत की सुंदर प्रस्तुति दी गई।सेमिनार के मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के माननीय कुलपति प्रो. राजेन्द्र लाकपाले रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में एसईसीएल, बिश्रामपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक डॉ. संजय सिंह विश्वविद्यालय, बलिया के पूर्व लोकपाल डॉ. गणेश कुमार पाठक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. रविन्द्र के. ब्रम्हे थे।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सि. शांता जोसेफ ने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा इसके संरक्षण एवं प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। सेमिनार की सह संयोजक एवं आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. मंजू टोप्पो ने आयोजन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतर्विषयी दृष्टिकोण से समझना और उसे वर्तमान संदर्भों में पुनर्परिभाषित करना है।उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन डॉ. कल्पना गुहा द्वारा किया गया। इसके पश्चात आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. रविन्द्र के. ब्रम्हे ने की तथा रिपोर्टिंग ममता कश्यप द्वारा की गई। सत्र का संचालन प्रज्ञा सिंह ने किया। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी प्रो. ब्रम्हे ने की, जिसमें रिपोर्टिंग डॉ. ममता अवस्थी द्वारा की गई।द्वितीय सत्र में डॉ. गणेश कुमार पाठक, इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक सहायक प्राध्यापक डॉ. विनोद सेन तथा अमेरिका के फ्लोरिडा से विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. दशरथ के. कापगाटे ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान , डॉ. राजीव रंजन तिग्गा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में संगीत की भूमिका के व्यावहारिक पक्ष पर प्रस्तुति दी उर्मिला तिवारी सहित विद्वानों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।सेमिनार में राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के अन्य प्रदेशों से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा छात्राओं की सक्रिय उपस्थिति रही।

































