

लखनपुर/ प्रिंस सोनी: लखनपुर अमेरा खुली खदान में कुछ दिन पहले हुए कांट्रेक्टर और मजदूरों के बीच झड़प के बाद एक नई बात निकलकर सामने आ रही है जहाँ अमेरा खुली खदान में कार्यरत मजदूरों में स्थानीय लोगो को प्राथमिकता नहीं देने सहित दूसरे राज्यों से मजदूर मंगा कार्य कराने की बात सामने आई है।
अमेरा खदान में कार्यरत कुछ मजदूरों ने बताया कि लखनपुर छेत्रांतर्गत अमेरा खुली खदान का प्रबंधन एसीसीएल (साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड) द्वारा किया जाता है जहाँ गुजरात की एक कंपनी एलसीसी को ज़मीन के भीतर से कोयला निकाल बाहर रखने सहित मिट्टी हटाने का कार्य ठेके पर दिया गया है ,उक्त कंपनी तीन महीने से कार्य कर रही है।जिसके बाद इस कंपनी में सैकड़ों की संख्या में मजदूर व कर्मचारी अलग अलग पदो पर कार्य करते हैं। इन पदों के अतिरिक्त मजदूरों की बात की जाए तो मजदूरों की संख्या भी इस खदान में काफ़ी ज़्यादा है जिसके बाद लखनपुर के छेत्र अंतर्गत आने से यह बात स्वाभाविक है कि लखनपुर अमेरा खदान के आसपास के ग्राम जैसे अमेरा,चिलबिल,पुहुपुटरा,सिंगीटाना,परसोड़ी आदि ग्राम के स्थानीय लोगो को यहाँ रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाने चाहिए बावजूद इसके मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,गुजरात,उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों के लोगो को प्राथमिकता दिया जाकर उनसे कार्य कराया जा रहा है तथा स्थानीय लोग अब भी रोजगार के लिए भटकते नजर आ रहे हैं परिणाम यह है कि रोजगार नहीं मिलने के कारण लोग आए दिन कोयला चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं ताकि कुछ धन अर्जित किया जा सके।
अमेरा कोयला खदान के प्रारंभ के साथ ही स्थानीय लोगों को ये उम्मीद थी की खदान खुलने से उन्हें रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा उन्हें एक बेहतर जीवन की प्राप्ति होगी फिलहाल ऐसा कुछ धरातल पर दिखाई नही देता। अगर बात रोजगार की कि जाए तो स्थानीय लोगो में कुछ लोगो को ही एलसीसी कंपनी के द्वारा कार्य पर रखा गया है जो कि या तो वाहन चालक के पद पर हैं या फिर मजदूरी का कार्य करते हैं या फिर सुरक्षा कर्मी का इससे ऊपर योग्यता के आधार पर दिए जाने वाले स्थान में उनका नाम कहीं दिखाई ही नहीं देता। पूर्व में अमेरा खदान से कोयला निकाले जाने के पश्चात यह खदान सर्वे के बाद पुनः प्रारंभ हुआ है और लोगो को इस बार भी खदान के माध्यम से रोजगार मिलने की पूरी उम्मीद थी परंतु अभी भी लोगो को रोजगार के नाम पर केवल ठेंगा दिखाया गया तथा बाहर के राज्यों के लोगो को प्राथमिकता दी गई। मजदूरों की माने तो शुरुआत से ही रोजगार के नाम पर या फिर मुआवजे के नाम पर केवल उन्हें छला ही गया है जिसके बाद अब लोग रोजगार के नाम पर काफ़ी मायूस हैं । स्थानीय लोग अब भी इस उम्मीद में हैं कि अमेरा खदान में उन्हे योग्यता के आधार पर प्राथमिकता दिया जाना चाहिए ताकि उनके जीवन में बदलाव आ सके।

































