रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को कानून का रूप दे दिया है। राज्यपाल रमेन डेका के हस्ताक्षर के बाद यह कानून पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। अब जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बजट सत्र में पास हुआ था विधेयक

यह विधेयक विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेश किया गया था और विपक्ष की अनुपस्थिति में पारित किया गया। अब औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद इसके प्रावधान प्रभावी हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि यह कानून अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है।

किन तरीकों से धर्मांतरण होगा अवैध

नए कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को बहला फुसलाकर, झूठी जानकारी देकर, दबाव बनाकर, अनुचित प्रभाव डालकर या किसी प्रकार का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही डिजिटल माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को भी स्पष्ट रूप से अवैध श्रेणी में रखा गया है।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए भी तय प्रक्रिया

यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित प्राधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना देना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति या सूचना के किया गया धर्म परिवर्तन संदेह के दायरे में आएगा।

विवाह के मामलों में भी कड़ी निगरानी

अलग अलग धर्म के लोगों के बीच विवाह की स्थिति में भी कानून ने स्पष्ट प्रावधान तय किए हैं। ऐसी शादी कराने वाले संबंधित अधिकारी या धार्मिक व्यक्ति को विवाह से आठ दिन पहले सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणापत्र देना होगा। इसके बाद अधिकारी यह जांच करेगा कि कहीं विवाह का उद्देश्य धर्म परिवर्तन तो नहीं है। यदि ऐसा पाया गया तो विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है।

दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा

अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि पीड़ित महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति, जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जा सकती है और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

सामूहिक धर्मांतरण पर और सख्ती

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में कानून और अधिक कठोर हो जाता है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है, साथ ही कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

सरकार का संदेश, नियमों का पालन अनिवार्य

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लागू किया गया है। सभी नागरिकों और संस्थाओं को इसके प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!