

अंबिकापुर: न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने और विधि के विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से शासकीय पी.जी. कॉलेज अंबिकापुर के विधि विभाग द्वारा मूट कोर्ट का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में एवं विधि विभाग के मूट कोर्ट प्रभारी डॉ. माधवेन्द्र तिवारी के निर्देशन में किया गया। इस मूट कोर्ट में विधि विभाग के छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया।
मूट कोर्ट की कार्यवाही ‘छत्तीसगढ़ राज्य बनाम सुरेश ’ हत्या के प्रकरण पर आधारित थी। इस प्रकरण के माध्यम से विद्यार्थियों ने न्यायालय में होने वाली पूरी प्रक्रिया जैसे – वाद प्रस्तुत करना, गवाहों की परीक्षा एवं प्रतिपरीक्षा, साक्ष्य प्रस्तुत करना, अधिवक्ताओं द्वारा बहस करना तथा न्यायाधीश द्वारा निर्णय सुनाना – का क्रमबद्ध एवं प्रभावी प्रदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की विभिन्न धाराओं का उपयोग करते हुए अपने-अपने पक्ष को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने न्यायाधीश, लोक अभियोजक, बचाव पक्ष अधिवक्ता, पीड़ित, विवेचक, गवाह तथा अर्दली जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया। विद्यार्थियों द्वारा निभाई गई भूमिकाएँ अत्यंत प्रभावशाली एवं वास्तविक न्यायालयीन वातावरण को प्रदर्शित करने वाली थीं। न्यायाधीश की भूमिका निभाने वाले विद्यार्थी ने पूरी कार्यवाही को नियंत्रित किया, वहीं अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष में प्रभावी तर्क प्रस्तुत किए। गवाहों की परीक्षा एवं जिरह की प्रक्रिया ने कार्यक्रम को और अधिक रोचक एवं ज्ञानवर्धक बना दिया।
इस मूट कोर्ट में विद्यार्थी आकेश्वर यादव,तीरथ प्रसाद प्रजापति, आशीष यादव, अभय मुंडा, सुमित्रा सिंह, प्रतीक्षा प्रजापति, पिंकी सिंह, उम्मीद दिपक, राजेश चौरसिया, रामविलास यादव, कमल रहाटे, अनीश साहनी, संगीता धुर्वे ने प्रस्तुति दी।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें न्यायालय की वास्तविक प्रक्रिया से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी या विधि विशेषज्ञ के रूप में कार्य करते समय न्यायालयीन प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझ सकें। मूट कोर्ट के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तर्कशक्ति, वाद-विवाद कौशल तथा न्यायालयीन शिष्टाचार का विकास होता है, जो विधि के क्षेत्र में सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. मिलेन्द्र सिंह, डॉ. तरुण राय, कु. पूनम सोनवानी सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया की वास्तविक जानकारी मिलती है, जिससे उनका भविष्य मजबूत होता है।

































