

दिल्ली। देश की राजधानी का ऐतिहासिक 150 साल पुराना लोहा पुल अब सेवा से बाहर हो गया है। यमुना नदी पर बने इस पुराने पुल की जगह नया आधुनिक और ऊंचा लोहा पुल बनकर तैयार हो गया है। नए पुल की खासियत यह है कि बाढ़ के समय भी अब ट्रेनों की रफ्तार नहीं रुकेगी और यह मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ दिया गया है।
पुल पर ट्रायल रन के लिए एक ईएमयू गाड़ी दौड़ाई गई, जो पूरी तरह सफल रही।
पुराने पुल की संरचना कमजोर हुई थी
करीब 150 साल पुराने इस लोहे के पुल की संरचना समय के साथ कमजोर हो गई थी। बारिश और बढ़ते जलस्तर के दौरान सुरक्षा कारणों से इस पर ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ता था।
इतिहास में यह पुल दिल्ली-हावड़ा रूट का मुख्य पुल रहा करता था, लेकिन अब इसे नए 249 नंबर के लोहा पुल ने प्रतिस्थापित कर दिया है।
नया पुल, नई तकनीक और मजबूती
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडे के अनुसार नया पुल पुराने से 4.5 मीटर ऊंचा बनाया गया है। यही वजह है कि अब यमुना के जलस्तर बढ़ने पर भी ट्रेनों का संचालन बाधित नहीं होगा।
पहले बाढ़ के समय रेल सेवा प्रभावित होती थी और सुरक्षा कारणों से ट्रेनों को बेहद धीमी गति से गुजरना पड़ता था। इससे यात्रियों को असुविधा होती थी और समय भी अधिक लगता था। नए पुल से यह समस्या पूरी तरह दूर हो गई है।
ऐतिहासिक विरासत का समापन
दिल्ली और शाहदरा के बीच यमुना पर बने इस ऐतिहासिक पुल ने उत्तर और पूर्व भारत को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण रेल कड़ी के रूप में काम किया। लाखों यात्रियों और भारी माल ढुलाई का भार उठाते-उठाते इसकी क्षमता कमजोर हो गई।
इतिहास में इसे अब विरासत के रूप में याद किया जाएगा, क्योंकि यह पुल अब सेवा से बाहर है और नई पीढ़ी का आधुनिक पुल इसकी जगह ले चुका है।

































