

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। राजनीतिक दल अपने प्रचार-प्रसार में जुटे हैं, वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव को लेकर कई अहम बातें कही।
मुस्लिम वोटरों का रुझान
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस चुनाव में राज्य के मुस्लिम वोटर केवल कांग्रेस या टीएमसी को ही प्राथमिकता देंगे। उनका कहना है कि वोटर अपनी पसंद तय करने में 'विनेबिलिटी इंडेक्स' यानी जीत की संभावना का ध्यान रखते हैं।
मतदाता सूची और चुनाव आयोग पर सवाल
चौधरी ने नवाचार आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र का मजाक है और चुनाव को स्थगित करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार की लापरवाही के कारण आम लोग अपने वोट का अधिकार ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
कांग्रेस की वर्तमान स्थिति
अधीर ने माना कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण है। उनका कहना है कि पार्टी और वाम दल दोनों इस समय कमजोर स्थिति में हैं और संगठनात्मक कमजोरी कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
मुस्लिम वोटरों की रणनीति
चौधरी के मुताबिक, मुस्लिम वोटर रणनीतिक तरीके से मतदान करते हैं। जहां कांग्रेस मजबूत रहती है, वहां वोटर उसकी ओर झुकते हैं, जबकि कमजोर क्षेत्रों में टीएमसी को समर्थन मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में राहुल गांधी के प्रति मुस्लिम समुदाय में भरोसा बढ़ा है।
ममता बनर्जी और कांग्रेस
अधीर ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी समय-समय पर NRC या SIR जैसे मुद्दे उठाकर मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस को संगठन मजबूत करने की जरूरत है, खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा, पुरुलिया और उत्तर दिनाजपुर जिलों में।
बंगाल की राजनीतिक तस्वीर
चौधरी ने कहा कि ममता बनर्जी कांग्रेस की मदद से सत्ता में आईं और इसके बाद धीरे-धीरे पार्टी को कमजोर किया गया। इस प्रक्रिया में धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं और BJP ने अपनी पकड़ मजबूत की, जबकि कांग्रेस और वामपंथी दल अपनी जमीन खोते चले गए।

































