

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी: कुसमी क्षेत्र में हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों ने सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। एक के बाद एक हुई घटनाओं ने न केवल क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण बनाया है, बल्कि समाज के भीतर बढ़ती दूरी को भी उजागर कर दिया है। हालांकि कुसमी पुलिस ने इस पुरे मामलें के प्रारम्भिक दौर से ही गंभीरता दिखाई और आपसी सौहार्द न बिगड़े इसका ख्याल भी रखा. तथा आरोपियों पर कार्यवाही भी की गई।
उल्लेखनीय हैं की सर्व प्रथम रामनवमी के दिन एक समुदाय विशेष के कुछ लोगों द्वारा दूसरे समाज के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे संबंधित समाज के लोग आहत हुए। यह मामला पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि कुछ ही दिनों बाद दूसरे समाज के एक व्यक्ति द्वारा एक अन्य समाज के व्यक्ति को अपमानित कर दुख पहुंचाने की घटना सामने आई। लगातार हुई इन घटनाओं ने कुसमी क्षेत्र की सामाजिक समरसता को गहरा आघात पहुंचाया है।
स्थिति यह बन गई है कि जहां अपराध के खिलाफ सभी समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए थी, वहां लोग अपने-अपने समाज और धर्म के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। किसी भी घटना में दोषियों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की मांग करने के बजाय, अलग-अलग वर्ग अपने समुदाय की ताकत दिखाने के लिए मैदान में उतरते दिखे। इससे न केवल विवाद बढ़ा है, बल्कि आपसी विश्वास और भाईचारा भी कमजोर हुआ है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दोनों ही पक्षों के उपद्रवियों के खिलाफ व्यापक सामाजिक एकता देखने को नहीं मिली। सभी समाज मिलकर असामाजिक तत्वों का विरोध करते तो स्थिति को जल्दी नियंत्रित किया जा सकता था। इसके विपरीत, समाज का एक बड़ा वर्ग अपने-अपने समूहों में बंटकर प्रतिक्रिया देता रहा, जिससे सामाज में गहरा असर पड़ा हैं। इस पर चाय की दुकान या पान के ठेलो में समीक्षा भी होते रहती हैं।स्थानीय बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति क्षेत्र के लिए खतरनाक संकेत है। यदि समय रहते सभी समाज के लोग मिलकर अपराध और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ एक स्वर में आवाज नहीं उठाते, तो भविष्य में ऐसे विवाद और गंभीर रूप ले सकते हैं।
आवश्यक है कि कुसमी के सभी समाज आपसी मतभेदों को भुलाकर कानून और न्याय के पक्ष में एकजुट हों। समाज की असली ताकत उसकी एकता और सामूहिक सोच में होती है, न कि अलग-अलग खड़े होकर शक्ति प्रदर्शन करने में। यदि समय रहते इस दिशा में पहल नहीं की गई, तो सामाजिक ताना-बाना और अधिक कमजोर हो सकता है।
कई वर्गों का मानना हैं की कुसमी के नागरिक शांति, सद्भाव और भाईचारे को प्राथमिकता देते हुए हर प्रकार के अपराध के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएं, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और सामाजिक संतुलन बना रह सके।

































