

भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर Yuvraj Singh एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम चरण से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है।
युवराज ने बताया कि जब उनका करियर खत्म होने की ओर था, तब उन्हें टीम मैनेजमेंट की तरफ से अपने भविष्य को लेकर कोई साफ संकेत नहीं मिला। उस समय टीम की कमान Virat Kohli के हाथों में थी, जबकि कोच की जिम्मेदारी Ravi Shastri निभा रहे थे।
फिटनेस पास करने के बाद भी नहीं मिला मौका
युवराज सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने फिटनेस टेस्ट सफलतापूर्वक पास किया था, इसके बावजूद उन्हें टीम में जगह नहीं दी गई। इस स्थिति ने उन्हें काफी निराश किया।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो खिलाड़ी लंबे समय तक देश का प्रतिनिधित्व करता है, उसे करियर के अंत में कम से कम सम्मान और स्पष्टता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, उन्हें यह कहा गया था कि फिटनेस टेस्ट पास करो, अन्यथा संन्यास लेने पर विचार करो। उन्होंने टेस्ट पास भी किया, लेकिन इसके बाद भी चयन नहीं हुआ, जिससे उनके मन में कई सवाल खड़े हो गए।
मुश्किल वक्त में धोनी से मिली सच्ची सलाह
इस कठिन दौर में युवराज ने टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी MS Dhoni से बातचीत की। उन्होंने बताया कि धोनी ने उन्हें ईमानदारी से स्थिति समझाई और सच्चाई से अवगत कराया।
युवराज ने कहा कि वह 36 से 37 साल की उम्र में थे और अपने करियर को लेकर असमंजस में थे। ऐसे समय में उन्हें लगा कि इतने साल देश के लिए खेलने के बाद कम से कम सम्मानजनक व्यवहार और स्पष्ट दिशा मिलनी चाहिए थी।
बयान के बाद फिर चर्चा में आया करियर का आखिरी दौर
युवराज सिंह के इस बयान के बाद उनके करियर के अंतिम दिनों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फैंस के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या उस समय उनके साथ सही व्यवहार हुआ था या नहीं।

































