

What is Geneva Convention: हर काम और प्रक्रिया के लिए नियम बनाए जाते हैं, ताकि उसके दौरान कुछ मूलभूत सीमाओं का उल्लंघन न हो। इसी तरह युद्ध के दौरान भी मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम तय किए गए हैं। इन्हीं नियमों का सबसे प्रमुख रूप है जेनेवा कन्वेंशन।
जेनेवा कन्वेंशन की शुरुआत 1949 में हुई थी। इसकी नींव रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यूनेन्ट ने रखी थी। 1859 में सॉल्फेरिनो युद्ध में घायल सैनिकों की स्थिति देखकर ड्यूनेन्ट ने महसूस किया कि युद्ध के दौरान घायल सैनिकों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही थी। दुश्मन सैनिक लगातार उन पर हमला कर रहे थे, जबकि उन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता थी। इस अनुभव ने उन्हें युद्ध में मानवीय सहायता के लिए कानून बनाने की प्रेरणा दी।
जेनेवा कन्वेंशन का इतिहास
- 1964: पहली संधि की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य युद्ध में घायल सैनिकों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना था।
- 1949: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चार महत्वपूर्ण जेनेवा संधियां बनाई गईं, जिन्हें आज हम जेनेवा कन्वेंशन के नाम से जानते हैं।
- इसके बाद तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल जोड़े गए, जो युद्ध में नियमों को और स्पष्ट करते हैं।
जेनेवा कन्वेंशन के मुख्य सिद्धांत
- युद्ध केवल लड़ाकों के बीच होना चाहिए।
- हथियार छोड़ चुके सैनिकों या युद्ध में शामिल नहीं होने वाले लोगों पर हमला नहीं किया जा सकता।
- युद्ध के दौरान महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित रहेंगे।
- स्कूल, अस्पताल, घर और अन्य नागरिक क्षेत्रों पर हमला निषिद्ध है।
- किसी भी घायल सैनिक या आम नागरिक को चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी, चाहे वह दुश्मन ही क्यों न हो।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता
शुरुआत में फ्रांस, ऑस्ट्रिया, पर्शिया, इटली, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय देश इसमें शामिल हुए। समय के साथ दुनिया के लगभग 194 देश इस संधि से बंधे, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय कानून का सबसे व्यापक और स्वीकृत हिस्सा बन गया।
युद्ध में इसका महत्व
जेनेवा कन्वेंशन यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित रहे और आम नागरिकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों पर हमले न हों और घायल सैनिकों को बिना भेदभाव के उपचार मिले।

































