बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े कुल 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 12 महिला कैडर भी शामिल हैं, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।

इन सभी माओवादियों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक रिकवरी भी की है। अधिकारियों के अनुसार, कुल 14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई है, जिसमें 2.90 करोड़ रुपये नकद और 11.16 करोड़ रुपये मूल्य का 7.20 किलोग्राम सोना शामिल है।सुरक्षा बलों ने इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में हथियार भी जब्त किए हैं। इनमें एलएमजी, AK-47, SLR, INSAS और .303 राइफल सहित कुल 93 घातक हथियार शामिल हैं। यह बरामदगी नक्सलियों की सैन्य क्षमता को बड़ा झटका देने वाली मानी जा रही है।

आत्मसमर्पण कार्यक्रम बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., डीआईजी सीआरपीएफ बी.एस. नेगी और पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। इस दौरान आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के परिजन और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं, जिनमें CyPC मंगल कोरसा उर्फ मोटू, CyPC आकाश उर्फ फागु उईका, DVCM शंकर मुचाकी और ACM पाले कुरसम जैसे नाम प्रमुख हैं। इन सभी ने संगठन की विचारधारा को निरर्थक बताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

पुलिस के अनुसार, बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक कुल 1003 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इस अवधि में अब तक कुल 19.43 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की जा चुकी है, जिसमें 6.63 करोड़ रुपये नकद और 12.80 करोड़ रुपये मूल्य का 8.20 किलोग्राम सोना शामिल है।

प्रशासन ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए हर संभव सहायता दी जाएगी।सुरक्षा बलों ने शेष माओवादी कैडरों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और विकास व शांति की मुख्यधारा से जुड़ें। “पूना मारगेम” अभियान के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में शांति, विश्वास और विकास की नई संभावनाएं मजबूत होती नजर आ रही हैं।

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