

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। सरकार की महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन योजना का जमीनी हकीकत से बॉक्साईट का उत्तखनन करने वाली अर्द्धशासकीय हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड कम्पनी को कोई सरोकार नहीं रह गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर - रामानुजगंज जिला अंतर्गत कुसमी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत सरईडीह, सामरी, कूटकू और टाटीझरिया में खुले में शौच मुक्त करने तथा स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य से हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड कम्पनी द्वारा बनाए गए शौचालय आज सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बॉक्साईट प्रभावित क्षेत्र में बनाए गए शौचालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जहाँ निर्माण तो कर दिया गया लेकिन पानी जैसी बुनियादी सुविधा की व्यवस्था ही नहीं की गई। परिणामस्वरूप ये शौचालय उपयोग के बजाय बेकार खड़े हैं और धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
मामला सामने आया हैं की निर्माण कार्य के दौरान केवल औपचारिकता निभाई गई। न तो जल व्यवस्था पर ध्यान दिया गया और न ही गुणवत्ता का ख्याल रखा गया। कई शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं, सफाई का अभाव है और उपयोग न होने के कारण बदहाल स्थिति में हैं। मुद्दे सामने आये हैं की बिना पानी के शौचालय किसी काम के नहीं हैं। मजबूरी में आज भी ग्रामीण खुले में शौच के लिए जा रहे हैं, जिससे न केवल स्वच्छता अभियान की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे को भी इस मॉडल देश में दावत मिल रहे हैं।
गंभीर बात यह है कि यह मामला कई बार सामने आता हैं पर हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी के आला अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सीएमआर और सीएसआर मद के नाम पर कागजों में कार्य दिखाकर केवल खानापूर्ति की गई है। हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर सीएसआर फंड के दुरुपयोग के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
ग्रामीणों की मांग..और बड़ा सवाल..?
ग्रामीणों की मिडिया के माध्यम प्रशासन और कंपनी से मांग की है कि शौचालयों में तत्काल पानी की स्थायी व्यवस्था की जाए, मरम्मत कर उन्हें उपयोगी बनाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। बड़े सवाल यह उठ रहें है की जब करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं बनाई जाती हैं, तो क्या उनका उद्देश्य सिर्फ कागजों में उपलब्धि दिखाना है..? सरईडीह की यह स्थिति न केवल व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो शासन-प्रशासन से लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।

































