

बिलासपुर : में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस की कार्रवाई में तीन महीने के भीतर एक हजार से अधिक वाहन चालक नशे की हालत में पकड़े गए। जांच के दौरान शराब की पुष्टि होते ही उनके वाहन मौके पर जब्त कर लिए गए और थानों में खड़े कर दिए गए।
यह अभियान राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कों पर लगातार जारी है।
जुर्माने से बचने के लिए वाहन लेने नहीं पहुंच रहे मालिक
अब पुलिस के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। जब्त किए गए वाहनों के मालिक उन्हें छुड़ाने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। बार बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।
इसकी मुख्य वजह भारी जुर्माना माना जा रहा है। कोर्ट में पेश होकर कम से कम 10 हजार रुपये का चालान भरना अनिवार्य है। वहीं अगर चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं है, तो 5 हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। यानी कुल मिलाकर 15 हजार रुपये तक का खर्च बैठ सकता है।
पुराने वाहनों के कारण बढ़ी परेशानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए अधिकांश वाहन पुराने हैं। ऐसे में कई मालिक इतना जुर्माना भरने के बजाय वाहन छोड़ना ही बेहतर समझ रहे हैं। कुछ लोग तो मामूली रकम जोड़कर नई या बेहतर स्थिति की गाड़ी खरीदने को ज्यादा उचित मान रहे हैं।
इस स्थिति के कारण थानों की पार्किंग क्षमता भी प्रभावित होने लगी है और नए अभियान चलाने में भी दिक्कत आ रही है।
अब नीलामी की तैयारी
यातायात पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अब लंबे समय तक वाहनों को थानों में खड़ा रखना संभव नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत जब्त किए गए वाहनों के मालिकों को अंतिम नोटिस दिया जा रहा है।
यातायात विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यदि वाहन मालिक तय समय में नहीं पहुंचते हैं, तो न्यायालय की अनुमति लेकर इन वाहनों की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पहले छह महीने से खड़े वाहनों पर कार्रवाई
नीलामी की प्रक्रिया में प्राथमिकता उन वाहनों को दी जाएगी, जो छह महीने या उससे अधिक समय से थानों में खड़े हैं। लंबे समय तक खड़े रहने के कारण कई गाड़ियों की हालत खराब हो चुकी है, इसलिए उनकी नीलामी उपयोगी पार्ट्स के आधार पर भी की जा सकती है।
सख्ती का असर और नई चुनौती
ड्रंक ड्राइव के खिलाफ सख्त कानून का असर तो दिख रहा है, लेकिन अब इसके चलते पुलिस को नई व्यवस्थागत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में नीलामी प्रक्रिया से इस समस्या के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

































