


नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद पर महत्वपूर्ण बयान दिया और कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की समस्या लगभग समाप्त हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में शिक्षा, राशन और गैस जैसी मूलभूत सुविधाओं का वितरण तेजी से हो रहा है।
लाल आंतक की परछाई खत्म
अमित शाह ने कहा कि “बस्तर पर लाल आंतक की परछाई थी, जो अब लगभग समाप्त हो गई है। जिले के हर गांव में स्कूल खोले जा रहे हैं। बीस हजार युवा शहीद हुए और कई लोग दिव्यांग हुए। वामपंथी विचारधारा नक्सलवाद की जड़ थी, न कि विकास की मांग।”
उन्होंने आगे कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि एक विचारधारा थी, जिसे 1970 से इंदिरा गांधी ने स्वीकार किया, जिससे यह फैलता चला गया।
वामपंथी उग्रवाद का अंत
गृहमंत्री ने कहा, “आज वामपंथी उग्रवाद समाप्त हो रहा है, और इसमें जनता का भी साथ है। हमारे जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना सबकुछ बलिदान किया। यह विचारधारा विकास से संबंधित नहीं थी। सत्ता बंदूक की नोंक से निकलती थी, जबकि लोकतंत्र में न्याय और कानून की ताकत होनी चाहिए।”
आदिवासियों के विकास पर कांग्रेस पर निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि “60 साल सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ? असम और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद ने वर्षों तक विकास को रोका। हमारी सरकार ने हर जिले में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई हैं। नक्सलवाद की जड़ गरीबी नहीं बल्कि वैचारिक थी।”
नीति: गोली का जवाब गोली से
गृहमंत्री ने स्पष्ट किया, “हमारी नीति यही है कि बातचीत केवल उन्हीं से होगी जो हथियार छोड़ते हैं। लेकिन जो गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से ही दिया जाएगा।”
सबके साथ न्याय करने वाली सरकार
अमित शाह ने लोकसभा में कहा, “हम एक लोकतंत्र में रहते हैं और संविधान के अनुसार काम करते हैं। यह सरकार किसी की धमकियों से डरने वाली नहीं है और सभी के साथ न्याय सुनिश्चित करती है।”
यह बयान न केवल बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा पर गंभीरता से काम कर रही है।































