अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। बलरामपुर - रामानुजगंज जिला के विकास खण्ड कुसमी अंतर्गत लावा जलाशय योजना का निर्माण प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किए जाने के बाद निविदा प्रक्रिया में उक्त निर्माण कार्य को हासिल करने वाले ठेकेदार द्वारा प्रारम्भ कर विभागीय मॉनिटरिंग शून्य रहने के कारण जमकर लापरवाही बरती जा रही है। इस लापरवाही में सम्बंधित विभाग द्वारा नजर अंदाज किया जाना मतलब सीधा-सीधा किसानों की सिंचाई सुविधा के साथ खिलवाड़ किया जाना है। जिससे संचालित जल संसाधन विभाग की जलाशय योजना इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है।

उक्त मामले में जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन मंत्रालय रायपुर से 11 जुलाई 2023 को बलरामपुर रामानुजगंज जिले के विकासखंड कुसमी की लावा जलाशय योजना की प्रशासनिक स्वीकृति का पत्र प्रमुख अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अंबिकापुर को जारी किया गया. जिसमें बलरामपुर - रामानुजगंज जिले के विकासखंड कुसमी की लावा जलाशय योजना के निर्माण हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई. जिसकी लागत 33 करोड़ 76 लाख 67 हजार रूपये हैं। तथा उक्त निर्माण का ठेका मेसर्स सिंसियर कंस्ट्रक्शन को मिल जाने के बाद कार्य प्रारम्भ कर प्रारम्भिक कार्य में ही लापरवाही बरती जाने की जानकारी आई हैं. लापरवाही के कारण शासन के पैसे का तो दुरूपयोग हो रहा हैं. साथ किसानों को सिचाई का बेहतर लाभ नहीं मिल पाने की संभावना जताई गई हैं।

ग्राम पंचायत लवकशपुर के सहायक ग्राम क्योंझर पहुंचकर वर्ष 2025 के मई माह में जल संसाधन विभाग के द्वारा लावा जलाशय योजना निर्माण का सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के हाथों भूमि पूजन करा कर कार्य प्रारम्भ कराया गया. इससे ग्रामीण किसानो में आशा जगी की सभी जिम्मेदार आये हैं तो कार्य किसानों के हित में होगी. परन्तु यहां का कार्य किसानों के हित में न कर ठेकेदार स्वम् के हित में कराने पर जुटा हैं। विभाग के द्वारा ठेकेदार के लापरवाही में किसी प्रकार का रोक-टोक नहीं किए जाने से विभागीय मिली भगत के संकेत आ रहें है।

बिना लौंदा बनाए गैर जिम्मेदाराना हरकत अपनाकर हाइवा वाहन से मिट्टी डंप

गांव के बुद्धिजीवि ग्रामीणो ने बताया की ग्राम क्योंझर में लंबे समय से किसानों की मांग रही है कि यहां सिंचाई के लिए जलाशय का कार्य किया जाना चाहिए इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पहल पर शासन से जलाशय निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृत मिलीं और भारी भरकम राशि जारी होकर कार्य प्रारम्भ की गई तो जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों के अनुपस्थिती का फायदा उठाकर ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक कार्य प्रारम्भ किया गया. अब तक हुए कार्य में अत्यधिक तेजी से करने के चक्कर में कम समय में ही पड़ल का कार्य प्रशिक्षु मजदूरों से बिना लौंदा बनाये डाइरेक्ट पॉकलेन मशीन के माध्यम करा दिया गया। विभाग के बिना मानिटारिंग के न तो काली मिट्टी पानी में फुलाया गया और न ही मजदूरों से एक निर्धारित मात्रा में मिट्टी का लौंदा बनाया गया. बल्कि काली मिट्टी के बजाय "पडल" डालने हेतु खुदाई किए गए गड्ढे में प्राकलन के विपरीत अनुपयोगी मिट्टी डाल कर गड्डे को शील किया गया। पड़ल के सम्पूर्ण कार्य हाइवा वाहन व पॉकलेन मशीन के सहारे किया गया। उक्त हरकत के परिणाम स्वरुप पडल कार्य में डाले गए प्राकलन के विपरीत मिट्टी से पानी सिपेज़ होने की संभावना जताई जा रही हैं. इसकी तस्वीर व वीडियो ग्राफी गांव के बुद्धिजीवियों ने नाम न बताने की सर्त पर मिडिया को उपलब्ध कराई हैं।

इन नियमों का ख्याल नहीं, कमीशनखोरी के चक्कर में लावा जलाशय कार्य में जमकर लापरवाही..

जानकारों ने बताया की जलाशय निर्माण में पड़ल डालने के नियम हैं की मुख्य रूप से जलाशय की क्षमता, जलाशय की गहराई, जल स्तर की निगरानी, और जल की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा पड़ल के प्रकार का चयन किया जाना अनिवार्य होता हैं.
जिससे जल संचयन की क्षमता प्रभावित न हो और गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत होने जैसी संभावना न है। उक्त किसी भी नियम पर गंभीरता नहीं बरता जाना ठेकेदार व विभागीय की सांठ-गांठ को प्रतीत कर रहा हैं. और कमीशनखोरी के चक्कर में लावा जलाशय कार्य में जमकर लापरवाही बरतने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा हैं. इससे सीधा-सीधा किसानों के साथ छलावा किया जा रहा हैं।

उक्त विषय पर मुख्य अभियंता हसदेव गंगा सह अधीक्षण अभियंता जल संसाधन सर्कल बलरामपुर अनिल खलखो ने कहा साइड देखकर बता पाउँगा. ईई को निर्देश दें देता हूँ। वहीं सम्बंधित ठेकेदार का पक्ष जानना चाहा गया किंतु वें संपर्क से बाहर थे।

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