नई दिल्ली: बार-बार होने वाली इंटरनेट कटौती और बिना मुआवजे के उपभोक्ताओं की परेशानियों को देखते हुए, रायपुर सांसद ब्रजमोहन अग्रवाल (भाजपा) ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण जनहित मुद्दा उठाया। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने और ब्रॉडबैंड बिलिंग में बदलाव की मांग की, ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक सेवा के आधार पर शुल्क देना पड़े।

आज के डिजिटल युग में इंटरनेट अब कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता बन गया है। 2024-25 में भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक डेटा उपयोग 27.5 GB से बढ़कर 36 GB के बीच पहुंच गया, लेकिन आम नागरिक अभी भी खराब नेटवर्क और बार-बार कनेक्शन बाधित होने से परेशान हैं। कई उपयोगकर्ताओं को महीने में 5-6 दिन तक इंटरनेट काम नहीं करता और उनकी शिकायतें अक्सर बिना समाधान के बंद कर दी जाती हैं।

लोकसभा के सातवें सत्र में नियम 377 के तहत सांसद अग्रवाल ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के सेवा गुणवत्ता विनियम, 2024 पर विधायी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ब्रॉडबैंड बिलिंग को बिजली मीटरिंग की तरह बनाया जाना चाहिए—जैसे बिजली कटने पर मीटर बंद हो जाता है, वैसे ही इंटरनेट डाउनटाइम के दौरान बिलिंग भी रोक दी जानी चाहिए।

अग्रवाल का प्रस्ताव उपभोक्ताओं के वित्तीय हितों की रक्षा और टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक और नागरिक-केन्द्रित समाधान पेश करता है। उनका कहना है कि यदि यह नियम लागू किया गया, तो उपभोक्ताओं को नेटवर्क व्यवधान के दौरान अनुचित शुल्क का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

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