नई दिल्ली : राजोकरी इलाके में स्थित वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स विवाद में Delhi High Court ने अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने Delhi Development Authority (DDA) को निर्देश दिया है कि जमीन के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों का पूरी तरह सत्यापन किया जाए और किसी भी निर्णय से पहले सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

बिना सत्यापन सीमांकन पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं के वकील सुमित गहलोत ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किलों के पास रजिस्टर्ड डीड, राजस्व रिकॉर्ड और स्वीकृत भवन योजना जैसे वैध दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद अधिकारियों ने बिना पुष्टि के जमीन के एक हिस्से को तूफानी नाले के क्षेत्र में चिन्हित कर दिया, जिससे उनके स्वामित्व अधिकार प्रभावित हुए।

कोर्ट ने सुनवाई का अधिकार बताया जरूरी

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजीव नरूला ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रक्रिया में भूस्वामियों को बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय से पहले सभी प्रभावित पक्षों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और आपत्तियां दर्ज करने का पूरा मौका दिया जाए।

9 दिसंबर 2025 के नोटिस से जुड़ा मामला

यह पूरा मामला DDA द्वारा 9 दिसंबर 2025 को जारी नोटिस से संबंधित है, जिसमें समालका और राजोकरी गांवों के बीच नाले के लिए भूमि सीमांकन का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने 2.75 एकड़ से अधिक जमीन पर अपना दावा पेश किया है।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता 24 अप्रैल 2026 को DDA के उप निदेशक (भूमि प्रबंधन) के समक्ष पेश हों। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी कानूनी अधिकार और विकल्प खुले रहेंगे।

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