अंबिकापुर: राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अंबिकापुर में हिंदी विभाग द्वारा ‘आदिवासी जीवन दर्शन, इतिहास और साहित्य’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रसिद्ध आदिवासी साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सदस्य महादेव टोप्पो ने किया।

संगोष्ठी का आधार वक्तव्य प्रख्यात उपन्यासकार एवं जनजातीय शोध केंद्र के पूर्व निदेशक रणेंद्र कुमार ने प्रस्तुत किया। उन्होंने आदिवासी जीवन दर्शन को प्रकृतिवादी दर्शन के रूप में व्याख्यायित करते हुए इसे सांख्य और बौद्ध दर्शन से जोड़ा तथा आदिवासियों के इतिहास और साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।उद्घाटन सत्र में महादेव टोप्पो ने आदिवासियों के वैश्विक संघर्ष और उनके रचनात्मक योगदान को रेखांकित करते हुए भारतीय आदिवासी साहित्य की समृद्ध परंपरा पर चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार सिन्हा ने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष पृथ्वी को बचाने का संघर्ष है और इस तरह की संगोष्ठियां अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम की संयोजक डॉ. कामिनी ने विषय प्रवेश कर संगोष्ठी की प्रासंगिकता और रूपरेखा प्रस्तुत की। दूसरे सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. जनार्दन कुमार ने संविधान सभा की बहसों के संदर्भ में आदिवासियत पर विचार रखे। वहीं नेपाल के साहित्यकार अनिष श्रेष्ठ ने वहां के आदिवासी साहित्य और आंदोलनों पर प्रकाश डाला। दुबई से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अनुपम पूर्ति ने ग्राफिक्स के माध्यम से मुंडा आदिवासियों की परंपराओं और त्योहारों को प्रस्तुत किया।तीसरे सत्र में डॉ. विश्वासी एक्का ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी साहित्य पर प्रकाश डाला, जबकि गोरखपुर से आए वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह ने वनटंगिया समुदाय के संघर्ष को सामने रखा।

कार्यक्रम का संचालन सुसन्ना लकड़ा, डॉ. विजयलक्ष्मी शास्त्री और डॉ. ब्रजेश कुमार ने किया, जबकि स्वागत उद्बोधन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक सिंह ने दिया। इस अवसर पर शहर के कई साहित्यकार, प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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