

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण संशोधन विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद अब “छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल” का नाम बदलकर “छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल” कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य मंडल को एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करना है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में बताया कि मंडल की भूमिका अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह शहरी अधोसंरचना, टाउन प्लानिंग और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स में भी सक्रिय भागीदारी निभाएगा। पिछले दो वर्षों में मंडल ने करीब 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की हैं, जबकि सरकार ने 735 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर इसे ऋणमुक्त भी किया है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण संशोधन विधेयक 2026 के तहत अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), जॉइंट वेंचर, रिडेवलपमेंट और स्लम पुनर्विकास जैसी आधुनिक योजनाओं को लागू करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, 650 करोड़ रुपये की लागत वाली 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है।
राज्य में 33 में से 27 जिलों में सक्रिय मंडल अब रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित करने जैसे सुधार भी कर रहा है। इसके अलावा, रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को जोड़कर एक बड़े शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

































