


भोपाल: महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू शिवदयाल चौरसिया की जयंती के अवसर पर अपना दल (एस) द्वारा हिंदी भाषी राज्यों में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह कार्यक्रम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के निर्देशानुसार तथा राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर.बी. सिंह पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित किए गए।
लखनऊ स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबू शिवदयाल चौरसिया के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। वहीं इंदौर कार्यालय में राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम के मार्गदर्शन में तथा सतना में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष युवा मंच मान सिंह बिसेन की अध्यक्षता में माल्यार्पण सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर.बी. सिंह पटेल ने कहा कि बाबू शिवदयाल चौरसिया का जीवन देशभक्ति, संघर्ष और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के विचार आज भी राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हैं तथा उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
इंदौर स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में बाबू शिवदयाल चौरसिया के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस दौरान डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग की बदौलत ही आज देश स्वतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाबू शिवदयाल चौरसिया जैसे सेनानियों का जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
वहीं सतना में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मान सिंह बिसेन ने कहा कि बाबू शिवदयाल चौरसिया का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों से सीख लेकर देश और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि महान स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों और उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सहभागिता रही, जिन्होंने बाबू शिवदयाल चौरसिया को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
































