सूरजपुर/ दीपेश कुशवाहा: देश में डिजिटल क्रांति और विकसित भारत की बात की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के ओडगी ब्लॉक स्थित खैरा गांव आज भी घोर अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर है। आजादी के 78 साल बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिससे लगभग 1500 ग्रामीण और 400 से अधिक घर बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

दरअसल आपको बता दे जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में बिजली की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ साल पहले क्रेडा विभाग द्वारा चार जगह सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट लगाए गए थे ताकि गांव में बिजली की व्यवस्था हो सके। लेकिन विडंबना यह है कि ये सभी प्लांट पिछले तीन साल से पूरी तरह बंद पड़े हैं। बैटरियां खराब हो चुकी हैं, इनवर्टर काम नहीं कर रहे और सोलर प्लेटें भी बेकार पड़ी हैं। इसके चलते पूरे गांव में अंधेरा पसरा रहता है।

हालात इतने खराब हैं कि अब गांव के लोग रात में मोबाइल की टॉर्च या बैटरी टॉर्च के सहारे ही अपना काम चलाते हैं। पहले ग्रामीण लालटेन और ढिबरी के सहारे रात गुजार लेते थे, लेकिन अब मिट्टी तेल यानी केरोसिन की आपूर्ति भी बंद हो चुकी है। ऐसे में गांव मानो लालटेन युग से भी पीछे चला गया है। पंखा, कूलर, फ्रिज और टीवी जैसी सुविधाएं यहां के लोगों के लिए सिर्फ सपना बनकर रह गई हैं।

अंधेरे का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जिससे बच्चों को पढ़ाई करने में भारी परेशानी होती है। मोबाइल चार्ज करने के लिए भी ग्रामीण पुराने सौर स्टार्टर की मदद से जुगाड़ कर चार्जिंग करते हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में यह स्थिति ग्रामीणों की मजबूरी को साफ दर्शाती है।

गांव की परेशानी सिर्फ अंधेरा ही नहीं है। खैरा गांव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इसके कारण क्षेत्र में अक्सर भालू, हाथी, बाघ और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। रात के समय जब गांव पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है, तब ग्रामीणों के मन में भय का माहौल बना रहता है।

ग्रामीण देवशरण सिंह कुसरो का कहना है कि सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट तीन से चार साल से बंद पड़ा है और बिजली नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है। कई बार प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली की व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर चक्काजाम करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि दिसंबर 2025 में गांव वालों ने धरना और अनशन भी किया था। उस समय प्रशासन ने लिखित में तीन महीने के भीतर बिजली लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तीन महीने पूरे होने को हैं और अभी तक न तो बिजली के पोल लगे हैं, न तार खिंचे हैं और न ही बिजली पहुंची है।

गौरतलब है कि खैरा गांव भटगांव विधानसभा क्षेत्र में आता है और यहां की विधायक लक्ष्मी राजवाड़े राज्य सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छत्तीसगढ़ को बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्य माना जाता है और यहां से दूसरे राज्यों को बिजली भेजी जाती है, तो फिर उसी प्रदेश का यह गांव आज भी अंधेरे में क्यों डूबा हुआ है।

खैरा गांव की यह तस्वीर विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इस अंधेरे को कब दूर करता है और गांव के लोगों को बिजली की रोशनी कब नसीब होती है।

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