


जबलपुर : मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने बुधवार को नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई निरस्त कर दी। एकलपीठ ने उन्हें अवमानना में दोषी करार देते हुए सजा पर सुनवाई निर्धारित की थी। जिसके खिलाफ महिला आईएएस अधिकारी ने अपील दायर की थी। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई के बाद एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए महिला आईएएस अधिकारी के पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किए।
बिल्डिंग अनुमति कर दी थी निरस्त
गौरतलब है कि नगर निगम भोपाल के द्वारा मर्लिन बिल्डकॉन प्रा लि. कि श्यामला हिल्स स्थित नादिर कॉलोनी में स्थित उसकी 3520 वर्ग फीट में बिल्डिंग की अनुमति 28 अगस्त 2025 को निरस्त कर दी गयी थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान नगर निगम ने विगत 18 जनवरी को बिल्डिंग का एक हिस्सा तोड़ दिया था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नगर निगम की कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत पारित दिशा-निर्देश के विपरीत पाते हुए मनमानी कार्यवाही किए जाने पर नगर निगम आयुक्त भोपाल संस्कृति जैन को तलब किया था।
कमिश्नर हुईं थी उपस्थित
याचिका की सुनवाई के दौरान 5 फरवरी को नगर निगम आयुक्त भोपाल संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुईं। सुनवाई पहले के चरण में नगर निगम आयुक्त भोपाल संस्कृति जैन एकलपीठ के समक्ष उपस्थित होकर बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामा प्रस्तुत करने की बात कही थी। दूसरे चरण में हुई सुनवाई के दौरान हलफनामा पेश नहीं किया गया। एकलपीठ ने मौखिक माफी स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की तोड़ी गयी बिल्डिंग को बहाल करने के संबंध में जानकारी मांगी।
नियम अनुसार हुई कार्रवाई
एकलपीठ को बताया गया कि नियम अनुसार बिल्डिंग को तोड़ा गया है, उसे बहाल नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा डेमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर एक्ट के तहत जारी की गयी गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर अवमानना का दोषी करार देते हुए 6 फरवरी को सजा के लिए सुनवाई निर्धारित की गयी थी।
नगर निगम ने दायर की अपील
भोपाल नगर निगम की तरफ से एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गयी थी। अपील के सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने 6 फरवरी को महिला आईएएस अधिकारी संस्कृति ने अपीलकर्ता बनने की इजाजत प्रदान एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी।
उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि गया कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के सेक्शन 10 के तहत हाई कोर्ट को सिर्फ अपने आदेश या अपने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन के लिए अवमानना कार्यवाही कर सकता है। हाईकोर्ट के पास अपने से बड़ी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है। अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार तभी है, जब न्यायालय के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ हो।
मर्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की पूरी याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि नगर निगम ने उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश या निर्देश का उल्लंघन किया है। पूर्व में अपील की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी। बुधवार को अपील की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश के साथ युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। युगलपीठ ने अपील की सुनवाई के बाद अपील का निराकरण करते हुए उक्त आदेश जारी किए।
































