रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2023 में निकाली गई लगभग 6000 कांस्टेबल पदों की भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों को देखते हुए नियुक्ति आदेश जारी करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने 27 जनवरी को पारित किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

क्या है मामला?

यह याचिका जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली के अभ्यर्थियों मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास समेत अन्य ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिजिकल टेस्ट में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ। टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को डेटा रिकॉर्डिंग का काम सौंपा गया था, जिसने कथित तौर पर पैसे के लेन-देन के जरिए 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुँचाया और संबंधित सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए।

नियमों का उल्लंघन

याचिका में बताया गया कि पुलिस भर्ती नियम 2007 के नियम 7 के अनुसार यदि भर्ती में अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर नई भर्ती कराई जानी चाहिए। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि लंबी कूद, भाला फेंक जैसी फिजिकल गतिविधियों में राज्य स्तर पर गड़बड़ी हुई है और स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच आवश्यक है।

हाईकोर्ट का आदेश

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कांस्टेबल नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं, साथ ही उत्तरदाता को नोटिस देकर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया।

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