सोने के बाजार में इन दिनों अस्थिरता बनी हुई है। कभी कीमतों में गिरावट निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है, तो कभी भाव में सुधार नई उम्मीद जगा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने की कीमतों में ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में भाव नीचे आया, लेकिन बाद में इसमें कुछ रिकवरी दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों से लेकर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे ग्राहकों तक की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।

MCX पर सुबह गिरा सोने का भाव, फिर दिखी रिकवरी

कारोबार की शुरुआत में सोने की कीमत 145 रुपये फिसलकर 1,49,398 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई थी। हालांकि, इसके बाद बाजार में सुधार देखने को मिला। दोपहर करीब एक बजे सोने का भाव बढ़कर 1,49,621 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। कीमतों में आया यह बदलाव बताता है कि फिलहाल बाजार में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच खींचतान बनी हुई है।इस तरह के उतार-चढ़ाव के बीच केवल शुरुआती गिरावट या बाद की तेजी देखकर बाजार की अगली चाल का अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेशकों को कीमतों के महत्वपूर्ण स्तरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों पर भी ध्यान देना होगा।

शून्या की रिपोर्ट में क्या मिले संकेत?

13 अक्टूबर 2026 की शून्या रिसर्च रिपोर्ट के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सोने की कीमतों में फिलहाल तेजी या गिरावट की कोई स्पष्ट दिशा सामने नहीं आई है। हालांकि, तकनीकी चार्ट पर बन रहे संकेत आगे बाजार में बड़े बदलाव की संभावना की ओर इशारा करते हैं।अगर सोना अपने महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर को पार कर लेता है, तो खरीदारी बढ़ने और कीमतों को सहारा मिलने की संभावना बन सकती है। इसके विपरीत, मजबूत सपोर्ट स्तर टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि तकनीकी संकेत संभावित बाजार दिशा का आकलन करने में मदद करते हैं, लेकिन वे भविष्य की कीमतों की गारंटी नहीं देते।

पिछले कारोबारी सत्र में भी आई थी तेज गिरावट

सोने पर दबाव केवल मौजूदा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सोमवार, 12 अक्टूबर को भी MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने की कीमत में कमजोरी दर्ज की गई थी। शाम के कारोबार में भाव करीब 1,49,899 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था और इस दौरान लगभग 1,600 रुपये की गिरावट देखी गई थी।इस कमजोरी के पीछे रुपये की मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर निवेशकों की सतर्कता जैसे कारक बताए गए। बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई संबंधी आंकड़ों पर भी बनी हुई है, क्योंकि इनके आधार पर ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बदल सकती हैं।

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह क्या है?

घरेलू बाजार में सोने का भाव कई आर्थिक और वैश्विक कारकों से प्रभावित होता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें, डॉलर की मजबूती, रुपये की विनिमय दर, ब्याज दरों की संभावनाएं और दुनिया की आर्थिक परिस्थितियां प्रमुख हैं।जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देखते हैं। इससे इसकी मांग को समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर में मजबूती या बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है। इसकी एक वजह यह है कि सोना नियमित ब्याज आय नहीं देता।इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होता है। इसलिए रुपये की तुलना में डॉलर महंगा होने पर भारतीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ सकती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव में उतनी तेजी न आई हो।

1.46 लाख रुपये का स्तर अहम, 1.55 लाख तक है चुनौती

उपलब्ध बाजार विश्लेषण के अनुसार, MCX पर सोने के लिए करीब 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 1.53 लाख से 1.55 लाख रुपये के बीच का दायरा प्रतिरोध क्षेत्र हो सकता है।यदि कीमतें सपोर्ट के ऊपर बनी रहती हैं और बाजार में खरीदारी मजबूत होती है, तो सोने में रिकवरी आगे बढ़ सकती है। इसके उलट, सपोर्ट टूटने पर गिरावट गहरी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।हालांकि, इन स्तरों को संभावित तकनीकी संकेत के रूप में ही देखना चाहिए। बाजार की वास्तविक दिशा बदलते वैश्विक हालात, निवेशकों की मांग और नए आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

त्योहारी सीजन में खरीदारों के लिए क्या है जरूरी?

भारत में सोने की मांग का संबंध निवेश के साथ-साथ त्योहारों, शादी-विवाह और पारिवारिक परंपराओं से भी है। ऐसे में कीमतों में मामूली बदलाव भी ग्राहकों के बजट पर असर डाल सकता है।लेकिन MCX पर सोने का वायदा भाव और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाली कीमत एक जैसी नहीं होती। आभूषण खरीदते समय सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए वायदा बाजार में भाव गिरने का मतलब यह नहीं है कि दुकानों पर गहनों की कीमत में भी उतनी ही कमी आ जाएगी।खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों के भाव और अतिरिक्त शुल्क की तुलना करना उपयोगी हो सकता है।

24 कैरेट और 22 कैरेट सोने में क्या अंतर है?

24 कैरेट सोना उच्चतम शुद्धता वाला सोना माना जाता है। इसके मुकाबले 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे आभूषण अधिक मजबूत बन सकें। इसी कारण दोनों की कीमतों में अंतर रहता है।निवेश के लिए सोने के सिक्के और बार जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि आभूषण बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट या अन्य उपयुक्त शुद्धता वाले सोने का इस्तेमाल किया जाता है। खरीदारी करते समय ग्राहकों को हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए।

आगे सोने की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

आने वाले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संकेत और डॉलर की चाल सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन कारकों में बदलाव होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारतीय कमोडिटी बाजार में भी उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।फिलहाल सोने का भाव 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। बाजार में तेजी लौटने की संभावना भी है और गिरावट बढ़ने का जोखिम भी। इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन के भाव के आधार पर फैसला लेने के बजाय बाजार के रुझान, अपने निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।

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