
दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के मामले को लेकर आप नेताओं ने विरोध जताया। पार्टी ने मौजूदा राजनीतिक हालात की तुलना वर्ष 1975 में देश में लागू आपातकाल से पहले के दौर से भी की है।
अरविंद केजरीवाल ने तिरंगा फहराने को लेकर उठाए सवाल
आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर दोनों नेताओं की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी अपराध की श्रेणी में आ गया है। केजरीवाल ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की।
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री से पूछा सवाल
आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या देश में ब्रिटिश शासन जैसी परिस्थितियां दोबारा लौट आई हैं।संजय सिंह के मुताबिक, सीजेपी नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और पार्टी सदस्य अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पहुंचे थे। वहां उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।उन्होंने कहा कि देश के युवा भारत माता की जय के नारे लगाते रहेंगे और बार-बार तिरंगा फहराएंगे। सिंह ने सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया।
सौरभ भारद्वाज ने आपातकाल से पहले के दौर से की तुलना
दिल्ली में आप के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को वर्ष 1975 में आपातकाल लागू होने से पहले के हालात से जोड़कर देखा। उन्होंने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों, छात्रों और श्रमिकों के आंदोलनों, आर्थिक परेशानियों तथा राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।भारद्वाज ने कहा कि सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और युवाओं के बीच बढ़ता असंतोष मौजूदा परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पांच दिन की न्यायिक हिरासत के औचित्य को लेकर पर्याप्त आधार सामने नहीं आया, इसके बावजूद दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज
सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आप ने पुलिस की कार्रवाई और देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेताओं ने इस घटनाक्रम को मौजूदा राजनीतिक माहौल के संदर्भ में देखा है और इसकी तुलना आपातकाल से पहले की परिस्थितियों से की है। हालांकि, आप नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के पीछे के कानूनी आधार का आकलन संबंधित आधिकारिक विवरणों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।




















