
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में मेडिकल डिग्री के सत्यापन और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बिरसा क्षेत्र में एक ही एमबीबीएस डिग्री से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग लोगों के सरकारी डॉक्टर के रूप में काम करने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. सुनील सिंह के खिलाफ राज्य शासन ने 9 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
2009 में संविदा नियुक्ति, 2020 में मिला बीएमओ का प्रभार
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) शत्रुघन दाहिया के अनुसार, डॉ. सुनील सिंह की बालाघाट में पहली नियुक्ति वर्ष 2009 में संविदा चिकित्सक के तौर पर हुई थी। वर्ष 2012 में उनकी सेवा नियमित कर दी गई। इसके बाद 2020 में उन्हें बीएमओ का प्रभार सौंपा गया।
अब डिग्री से संबंधित कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद उनकी नियुक्ति और लंबे समय तक सरकारी सेवा में बने रहने की प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है।
एक जैसी शैक्षणिक जानकारी से खुला मामला
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि दो डॉक्टरों के नाम, पिता के नाम, जन्मतिथि, मेडिकल कॉलेज, डिग्री प्राप्त करने के वर्ष और पाठ्यक्रम से जुड़ी जानकारी में समानता थी। दोनों अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे थे।
इस मामले की जांच पिछले पांच महीनों से चल रही थी। अब डॉ. सुनील सिंह की डिग्री को फर्जी पाए जाने की जानकारी के बाद करीब 17 साल की सरकारी सेवा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया की भूमिका की भी जांच जरूरी हो गई है।
वर्षों तक विभाग को नहीं लगी कथित धोखाधड़ी की भनक
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों डॉक्टरों ने लंबे समय तक सरकारी अस्पतालों में काम किया और वेतन भी प्राप्त किया। इस दौरान निजी क्लिनिक चलाने की बात भी सामने आई है। मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन में चूक कहां हुई और संबंधित प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही।
बीएनएस की तीन धाराओं में केस दर्ज
बिरसा पुलिस ने तत्कालीन बीएमओ डॉ. सुनील सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से नौकरी हासिल करने के आरोपों की जांच की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की कड़ियां, कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में हुई संभावित चूक की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




















