
पेट्रोल-डीजल : कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उछाल ने भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। पिछले तीन महीनों में यह इसकी सबसे ऊंची स्थिति मानी जा रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आगे भी बनी रहती है, तो घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर आयात का खर्च बढ़ता है और इसका असर आगे चलकर घरेलू ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों ने बढ़ाई बेचैनी
ब्रेंट क्रूड, जिसे वैश्विक तेल बाजार का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है, करीब 97.13 से 97.31 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 98.06 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।दूसरी ओर अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी करीब 92.63 से 92.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है। इसमें 1.25 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का क्रूड आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि का दबाव भी बढ़ सकता है।
आज इन शहरों में कितना है पेट्रोल और डीजल
| शहर | पेट्रोल प्रति लीटर | डीजल प्रति लीटर |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 रुपये | 95.20 रुपये |
| मुंबई | 111.31 रुपये | 97.97 रुपये |
| कोलकाता | 113.51 रुपये | 99.82 रुपये |
| चेन्नई | 107.78 रुपये | 99.56 रुपये |
| बरेली | 102.25 रुपये | 95.46 रुपये |
| पटना | 113.35 रुपये | 99.36 रुपये |
| रांची | 106.12 रुपये | 100.49 रुपये |
| आगरा | 101.90 रुपये | 95.02 रुपये |
| ग्वालियर | 114.30 रुपये | 99.35 रुपये |
मिडिल ईस्ट का तनाव बना बड़ी वजह
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अहम कारण बनकर सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े टकराव ने तेल की वैश्विक सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। जहाजों और तेल टैंकरों से जुड़ी घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की नजर सप्लाई रूट पर टिक गई है।सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है।
तेल की सप्लाई बाधित होने का डर क्यों बढ़ा
तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज क्षेत्र से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। बताया जा रहा है कि मई के बाद इस रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है और फिलहाल प्रतिदिन औसतन करीब 10 कमोडिटी जहाज ही इस मार्ग से गुजर पा रहे हैं।यही स्थिति कच्चे तेल के बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रही है। बाजार को आशंका है कि यदि समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान बना रहा, तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
महंगाई के साथ आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर
अगर क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों के लिए है जो रोजाना निजी वाहन या सार्वजनिक परिवहन से लंबी दूरी तय करते हैं। ईंधन महंगा होने पर उनके मासिक परिवहन खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार की दिशा भारत के घरेलू ईंधन बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

















