पेट्रोल : एथनॉल मिलाने की नीति, चीनी की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के बीच पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी हो गए हैं। 22 अगस्त को देश के कई प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और क्रूड ऑयल की चाल पर बाजार की नजर बनी हुई है।

दिल्ली और मुंबई में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।देश में 25 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में बड़ी बढ़ोतरी के बाद से कीमतों में स्थिरता देखने को मिल रही है। उस दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी।

क्रूड ऑयल में तेजी ने बढ़ाई बाजार की हलचल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा है। रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 6.39 प्रतिशत और अमेरिकी क्रूड में 5.66 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।ब्रेंट क्रूड 61 सेंट यानी 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। दूसरी ओर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगातार छह कारोबारी सत्रों तक मजबूत रहा और शुक्रवार को 87.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

क्या एथनॉल नीति से महंगी हो रही है चीनी

सरकार ने उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति को चीनी की बढ़ती कीमतों का कारण बताया जा रहा था। सरकार का कहना है कि एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है।आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में एथनॉल के लिए करीब 12 प्रतिशत चीनी का उपयोग किया जाता था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, देश में बनने वाले कुल एथनॉल का करीब तीन चौथाई हिस्सा अब अनाज, विशेष रूप से मक्के से तैयार हो रहा है।

चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई वजहें

सरकार के अनुसार, चीनी की मौजूदा महंगाई को केवल एथनॉल नीति से जोड़ना सही नहीं है। घरेलू उत्पादन में अपेक्षा से कमी, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, मौसम से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान और वैश्विक स्तर पर चीनी की सीमित उपलब्धता जैसे कारण कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।इसके साथ ही बाजार के कुछ हिस्सों में सट्टेबाजी और जमाखोरी को भी दाम बढ़ने की एक वजह माना गया है।

उत्पादन और खपत का क्या है हिसाब

भारत में सामान्य तौर पर हर साल करीब 320 से 340 एलएमटी चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280 से 290 एलएमटी के बीच रहती है। ऐसे में उत्पादन, मांग और बाजार की गतिविधियां आने वाले समय में चीनी के दाम की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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