
दुर्ग। आगामी त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों को देखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन ने नगरीय क्षेत्रों में पंडालों और अस्थाई संरचनाओं के निर्माण के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब आयोजन की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, सीसीटीवी, अग्नि सुरक्षा और बिजली कनेक्शन से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य होगा। नियमों का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में नगरीय निकायों के अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल भी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रमुख मार्गों पर पहले से लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
BSP की जमीन पर आयोजन के लिए लिखित अनुमति जरूरी
भिलाई इस्पात संयंत्र की भूमि पर किसी भी प्रकार का आयोजन करने से पहले बीएसपी प्रबंधन की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं पंडाल या आयोजन के क्षेत्रफल के अनुसार नगरीय निकाय शुल्क निर्धारित करेंगे।प्रशासन ने यह भी तय किया है कि आयोजन की अनुमति जारी करने से पहले पुलिस विभाग का अभिमत लेना जरूरी होगा, ताकि सुरक्षा और यातायात से जुड़ी व्यवस्थाएं पहले ही सुनिश्चित की जा सकें।
आयोजकों को जमा करनी होगी अग्रिम सुरक्षा निधि
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए आयोजकों से अग्रिम सुरक्षा निधि ली जाएगी। 5 हजार वर्ग फीट तक के आयोजन के लिए 10 हजार रुपये जमा करने होंगे। इससे बड़े आयोजनों के लिए 2 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से सुरक्षा निधि निर्धारित की गई है।आयोजन समाप्त होने के बाद स्थल का निरीक्षण और पंचनामा तैयार किया जाएगा। किसी प्रकार का नुकसान नहीं मिलने पर एक सप्ताह बाद सुरक्षा राशि वापस की जाएगी।आयोजकों को अग्निशामक यंत्रों के साथ रेत और पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी।
महिला और पुरुषों के लिए अलग शौचालय अनिवार्य
आयोजन में आने वाले लोगों की संभावित संख्या के अनुसार पर्याप्त महिला और पुरुष शौचालयों की व्यवस्था करना जरूरी होगा। यदि आयोजक यह व्यवस्था नहीं करते हैं तो नगरीय निकाय निर्धारित शुल्क लेकर सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं।
CCTV से होगी सुरक्षा की निगरानी
5 हजार वर्ग फीट तक के आयोजन में कम से कम 8 उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। इससे बड़े आयोजन स्थलों पर क्षेत्रफल के अनुपात में कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।कैमरों में कम से कम तीन दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की क्षमता होनी चाहिए। प्रवेश और निकास द्वार, पार्किंग, मूर्ति स्थल और मनोरंजन क्षेत्रों को सीसीटीवी की निगरानी में रखना होगा।
बिजली कनेक्शन के लिए NOC और नो-ड्यूस जरूरी
आयोजकों को बिजली कंपनी या बीएसपी विद्युत विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। अस्थाई बिजली कनेक्शन मीटर के साथ लेना अनिवार्य रहेगा।सुरक्षा निधि वापस लेने से पहले संबंधित विभाग से नो-ड्यूस प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
आधे स्थल में पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी
बढ़ती पार्किंग समस्या को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। आयोजन के लिए आवंटित कुल स्थल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा पार्किंग के लिए आरक्षित रखना होगा।पार्किंग के नाम पर किसी भी तरह की अवैध वसूली की अनुमति नहीं होगी।
झूले और ऊंची झांकियों के लिए तकनीकी प्रमाण पत्र
झूलों, मनोरंजन उपकरणों और 15 फीट से अधिक ऊंची झांकियों या गुफाओं के लिए तकनीकी सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। यह प्रमाण पत्र लोक निर्माण विभाग या संबंधित नगरीय निकाय के इंजीनियर से लेना होगा।
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर रोक
प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।इसके अलावा आयोजन स्थल और विसर्जन यात्रा मार्ग के आसपास पटाखे और आतिशबाजी पर पूरी तरह रोक रहेगी।
जबरन चंदा वसूली पर होगी कानूनी कार्रवाई
पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए लिया जाने वाला चंदा पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। आयोजकों को चंदा देने वालों को अनिवार्य रूप से रसीद देनी होगी।जबरन चंदा वसूली की शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के नए निर्देशों के बाद आगामी त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा नियमों के पालन पर विशेष निगरानी रहने की संभावना है।




















