मध्य प्रदेश: दमोह जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। अपने बीमार बेटे का इलाज कराने पहुंची एक महिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में फर्श साफ करती दिखाई दी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की सफाई व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में सफाई के लिए करीब 55 कर्मचारियों की तैनाती बताई गई है और इस व्यवस्था पर हर महीने लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है।

बीमार बेटे के इलाज के लिए अस्पताल पहुंची थी महिला

जानकारी के अनुसार, तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली हल्की बहू अपने बीमार बेटे को लेकर दमोह जिला अस्पताल पहुंची थीं। महिला के मुताबिक, उसके बेटे को दस्त की शिकायत थी। वह इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आई थी, लेकिन देर रात पुरुष वार्ड में हुई घटना ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

नर्स के कहने पर फर्श साफ करने का आरोप

सामने आए वीडियो में महिला अस्पताल के फर्श पर पोछा लगाती नजर आ रही है। जब उससे पूछा गया कि वह मरीजों के वार्ड में सफाई क्यों कर रही है, तो महिला ने बताया कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उसे फर्श पर फैली गंदगी साफ करने के लिए कहा था।यदि महिला का आरोप सही है, तो यह अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल के साथ वार्डों की स्वच्छता बनाए रखना भी प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में मरीज के परिजन से सफाई कराने की नौबत क्यों आई, इसकी जांच जरूरी है।

55 कर्मचारियों की तैनाती, हर महीने 8 से 9 लाख रुपये खर्च का दावा

जानकारी के मुताबिक, दमोह जिला अस्पताल में सफाई व्यवस्था के लिए आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से तीन सुपरवाइजर और 52 सफाईकर्मी तैनात किए गए है। इस तरह कुल 55 कर्मचारियों के जरिए अस्पताल की सफाई व्यवस्था संचालित किए जाने की बात कही गई है।अस्पताल प्रबंधन के दावे के अनुसार, सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब 8 से 9 लाख रुपये खर्च किए जाते है। इसके बावजूद यदि किसी मरीज के परिजन को वार्ड का फर्श साफ करना पड़े, तो यह व्यवस्था की निगरानी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने पर सवाल खड़े करता है।

अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल में सफाईकर्मियों की पर्याप्त तैनाती और नियमित खर्च का दावा किया जा रहा है, तो वार्ड की सफाई मरीज के परिजन से क्यों कराई गई? क्या संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी और कामकाज की नियमित निगरानी होती है? क्या वार्ड में सफाई की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी?फिलहाल सामने आए मामले ने अस्पताल की सफाई व्यवस्था और प्रबंधन की जवाबदेही को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। महिला के आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!