महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी वेतन व्यवस्था से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर में पदस्थ एक सहायक ग्रेड 2 लिपिक ने कथित तौर पर रिकॉर्ड में अपना पद और वेतनमान बदलकर खुद को व्याख्याता के तौर पर दर्ज करा लिया। इसके बाद वह करीब 8 महीने तक व्याख्याता के पद के मुताबिक वेतन लेता रहा।मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच में स्कूल के अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आने के बाद उन पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।

वेतन बिल बनाने की जिम्मेदारी का उठाया फायदा

मामले में सिरपुर स्कूल में पदस्थ सहायक ग्रेड 2 लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर का नाम सामने आया है। उसका मूल पद लेवल 6 का था, लेकिन रिकॉर्ड में कथित तौर पर उसे व्याख्याता एलबी के लेवल 9 के पद पर दर्शा दिया गया।बताया जा रहा है कि स्कूल में शिक्षकों के वेतन से संबंधित बिल तैयार करने का काम लिपिक के पास था। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए उसने प्राचार्य के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया और मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने पदनाम और वेतनमान में बदलाव कर दिया।

8 महीने तक निकलता रहा बढ़ा हुआ वेतन

रिकॉर्ड में बदलाव के बाद नारायण प्रसाद निर्मलकर ने करीब आठ महीने तक व्याख्याता के पद के अनुसार वेतन प्राप्त किया। इस दौरान सरकारी खजाने को करीब 13 लाख रुपये की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक वेतन में हुए इस बदलाव की जानकारी स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग और कोषालय स्तर तक कैसे नहीं पहुंची।

रायपुर से हुई जांच तो सामने आया पूरा मामला

मामले का खुलासा जनवरी 2026 में हुआ। रायपुर स्थित संचालनालय कोष एवं लेखा के अधिकारियों की नजर सिरपुर स्कूल से निकलने वाले असामान्य रूप से अधिक वेतन पर पड़ी। इसके बाद जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो लिपिक द्वारा अपने पद और वेतनमान में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई।जांच के बाद मामले ने तूल पकड़ा और विभाग ने संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।

प्राचार्य और जिला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी पर भी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद 27 जनवरी को नारायण प्रसाद निर्मलकर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद आगे की जांच में प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी सामने आने पर लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने 18 सितंबर को प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर और जिला शिक्षा कार्यालय के लिपिक अकील मोहम्मद खान को भी निलंबित कर दिया।इस कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच जारी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी तरीके से पद और वेतनमान बदलने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और सरकारी राशि की वसूली किस तरह की जाएगी।

कलेक्टर ने दिए थे FIR के निर्देश, अब तक दर्ज नहीं हुआ मामला

मामले में कलेक्टर की ओर से FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, बताया जा रहा है कि निर्देश के करीब आठ महीने बाद भी पुलिस में FIR दर्ज नहीं हुई है।फिलहाल विभागीय जांच चल रही है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।

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