
जनता रोज गड्ढों, जलभराव और बदहाल सड़कों की परेशानी झेले, जबकि जिम्मेदार वीआईपी मूवमेंट और तैयारियों में व्यस्त रहें। आखिर आम लोगों की समस्याओं की सुध कौन लेगा?"
24 अगस्त की समीक्षा बैठक में गड्ढे भरने और सड़क सुधार के दिए गए थे निर्देश, लेकिन राजपुर क्षेत्र में अब भी जलभराव, कीचड़ और गहरे गड्ढों से लोग परेशान
बलरामपुर/राजपुर। अंबिकापुर से रामानुजगंज को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-343 इन दिनों अपनी जर्जर स्थिति को लेकर चर्चा में है। सड़क पर जगह-जगह बने बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई डामर की परत और बारिश के बाद हुए जलभराव ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वाहन चालकों का कहना है कि इस मार्ग पर सफर करना अब जोखिम भरा हो गया है, जबकि पैदल चलने वालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति के कारण रोजाना दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कई स्थानों पर गड्ढे इतने गहरे हो चुके हैं कि उनमें दोपहिया और चारपहिया वाहनों के पहिए तक धंस जा रहे हैं। सड़क पर भरे पानी के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण सड़क की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन स्थायी मरम्मत की दिशा में अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दे रही।
छात्र -छात्राएं सड़क छोड़ नाली किनारे घास और कीचड़ में चलने को मजबूर
सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर छात्रावास में रहने वाले छात्र - छात्राओं पर पड़ रहा है। स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को सड़क पर पैदल चलने तक की जगह नहीं मिल रही है। जलभराव और गड्ढों से बचने के लिए उन्हें सड़क किनारे बनी नाली के पास घास और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्राएं रोजाना जोखिम उठाकर आवागमन कर रही हैं और कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
वीडियो में भी देखा जा सकता है कि छात्राएं जोखिम उठाकर किसी तरह अपने गंतव्य तक पहुंच रही हैं।वहीं सड़क की खराब हालत के कारण चार पहिया और दोपहिया वाहन भी गड्ढों में फंस रहे हैं। कई जगह वाहनों के पहिए पूरी तरह गड्ढों में धंसते नजर आ रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की नींद नहीं टूट रही है।लोगों का सवाल है कि जब छात्राओं की सुरक्षा तक खतरे में है और लगातार दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है, तब भी सड़क की मरम्मत को लेकर ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही?
बैठकों में समय-सीमा तय होती रही, लेकिन सड़क के गड्ढे आज भी जस के तस
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के राजपुर आगमन से पहले 24 अगस्त को आयोजित समय-सीमा बैठक में जिले की सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई थी। बैठक में कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने एनएच और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को खराब सड़कों एवं गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराने, दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी संकेत लगाने तथा कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। बैठक में आम जनता की सुविधा और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई थी।

हालांकि बैठक के कई दिन बाद भी एनएच-343 की स्थिति में कोई विशेष सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। सड़क पर गड्ढे आज भी जस के तस बने हुए हैं और जलभराव की समस्या भी बरकरार है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब सड़क सुधार और गड्ढे भरने के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे, तो उनका असर धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा। इस निर्देश को केवल मुख्यमंत्री के वीआईपी मूवमेंट के तैयारियों के रूप में जोड़कर देखा जा रहा है जिस निर्देश का अमल जमीनी स्तर पर होता नजर नहीं आ रहा।

जनता पूछ रही - जब रोज हजारों लोग इस मार्ग से गुजरते हैं, तो उनकी सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता क्यों नहीं बन पा रही है?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि लगातार दुर्घटनाओं की आशंका, छात्र - छात्राओं की परेशानी और आम लोगों की मुश्किलों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क सुधार के निर्देश केवल बैठकों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रह जाएंगे, या फिर जमीनी स्तर पर भी इसका असर दिखाई देगा। यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसकी अनदेखी सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा मामला है। अब लोगों को नई घोषणाओं और निर्देशों से ज्यादा सड़क पर दिखाई देने वाली कार्रवाई का इंतजार है।




















