
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस की 2014 बैच की डीएसपी माधुरी धिरही को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) पद पर पदस्थापना के मामले में हाईकोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने याचिका को मेरिट से रहित मानते हुए स्पष्ट किया कि किसी पद के लिए पात्रता पूरी कर लेना अपने आप में पदोन्नति या पदस्थापना का अधिकार नहीं देता।
DPC के फैसले में कोर्ट को नहीं मिली मनमानी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि डीपीसी ने माधुरी धिरही की सेवा प्रविष्टियों और ACR के आधार पर उनकी उपयुक्तता का आकलन किया था। समिति ने ASP पद के लिए निर्धारित मानक के आधार पर उन्हें 'अनफिट' माना था। कोर्ट को इस निर्णय में दुर्भावना, पक्षपात या मनमानी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
15 अंक का था न्यूनतम बेंचमार्क
ASP पद के लिए डीपीसी ने 'गुड' ग्रेडिंग के साथ न्यूनतम 15 अंकों का बेंचमार्क निर्धारित किया था। माधुरी धिरही को सेवा रिकॉर्ड के आधार पर कुल 14 अंक मिले, जो निर्धारित मानक से एक अंक कम थे। उनके रिकॉर्ड में चार 'वेरी गुड' और एक 'गुड' ग्रेडिंग दर्ज थी।
कोर्ट ने कहा- केवल पात्रता से नहीं मिलता प्रमोशन का अधिकार
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी अधिकारी को पदोन्नति के लिए केवल पात्र होने से पद पर नियुक्ति का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होता। अधिकारी को नियमानुसार पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार (Right to be considered) जरूर है। डीपीसी सेवा रिकॉर्ड और ACR के आधार पर अधिकारियों की उपयुक्तता तय कर सकती है और सभी पात्र अधिकारियों के लिए समान बेंचमार्क निर्धारित कर सकती है।
भेदभाव का आरोप साबित नहीं कर सकीं याचिकाकर्ता
कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में सफल नहीं रहीं कि 15 अंकों का बेंचमार्क उनके खिलाफ भेदभावपूर्ण तरीके से निर्धारित या लागू किया गया था। ऐसे में हाईकोर्ट ने डीपीसी के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद डीएसपी माधुरी धिरही की ASP पद पर पदस्थापना को लेकर दायर कानूनी चुनौती खारिज हो गई है।




















