जांच में देरी और साठगांठ के आरोप,जांच पर उठे देशभर में सवाल

अभिषेक कुमार सोनी✍️

रांची/बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले से लापता 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी का मामला अब गुमशुदगी से आगे बढ़कर कथित हत्या और “कंकाल कांड” में तब्दील हो गया है। लगभग नौ महीने बाद जंगल से कंकाल बरामद होने, आरोपी की गिरफ्तारी, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल और अदालत की सख्ती ने इस पूरे प्रकरण को राज्य का बहुचर्चित मामला बना दिया है। मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अदालत ने जांच में गंभीर लापरवाही और डीएनए परीक्षण में देरी को लेकर नाराजगी जताते हुए डीजीपी से लेकर बोकारो एसपी, डीएसपी, एफएसएल निदेशक और एसआईटी टीम के अधिकारियों को तलब किया है।

मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच की धीमी गति और डीएनए परीक्षण में देरी पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को फटकार लगाई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट पूछा कि कंकाल मिलने के कई दिन बाद भी डीएनए जांच क्यों नहीं कराई गई और क्या युवती के माता-पिता के नमूने लिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। कोर्ट ने डीजीपी, बोकारो एसपी, एफएसएल निदेशक और एसआईटी टीम को सभी दस्तावेजों के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

लापता से ‘कंकाल कांड’ तक बोकारो में पुष्पा केस ने उठाए कई अनसुलझे सवाल

मामले की पृष्ठभूमि में 31 जुलाई 2025 से लापता पुष्पा कुमारी का प्रकरण है। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खूंटाडीह गांव की रहने वाली पुष्पा कुमारी अचानक लापता हो गई। परिजनों ने उसी समय गांव के युवक दिनेश महतो पर संदेह जताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती दौर में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद पीड़िता की मां रेखा देवी ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की, जिसके बाद मामला न्यायालय की निगरानी में आ गया।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच तेज हुई और पुलिस ने आरोपी दिनेश महतो को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने युवती की हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार दोनों के बीच पिछले तीन वर्षों से प्रेम संबंध थे और शादी को लेकर दबाव व विवाद के चलते आरोपी ने साजिश रची। घटना के दिन वह युवती को बहाने से सुनसान जंगल में ले गया और धारदार हथियार से उसकी हत्या कर शव को झाड़ियों में छिपा दिया।आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से कंकाल, कपड़े, बालों के अवशेष और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद करने का दावा किया है। हालांकि, बरामद कंकाल को लेकर अब भी संदेह बना हुआ है। प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि जिस स्थान से कंकाल मिलने की बात कही जा रही है, वह आम आवाजाही वाला इलाका है, ऐसे में वहां लंबे समय तक शव का बिना किसी सूचना के पड़े रहना संदिग्ध प्रतीत होता है। साथ ही कंकाल के काफी पुराने होने की आशंका भी जताई गई है। खुद पीड़िता की मां ने भी बरामद अवशेष को अपनी बेटी का मानने से इनकार किया है, जिससे मामले में नई जटिलता उत्पन्न हो गई है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर खड़ा हुआ है। जांच के दौरान यह सामने आया कि शुरुआती अनुसंधान में गंभीर लापरवाही बरती गई और कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोपी को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगे। इसी के चलते पिंड्राजोरा थाना प्रभारी समेत कुल 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें सब-इंस्पेक्टर, एएसआई, हवलदार और सिपाही शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक द्वारा विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कंकाल का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और एफएसएल व डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। लेकिन कोर्ट ने इस पर भी नाराजगी जताई कि इतनी महत्वपूर्ण जांच में अनावश्यक देरी क्यों की गई।

पूरे मामले ने राज्य में पुलिस व्यवस्था और जांच प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश का माहौल है।अब इस बहुचर्चित मामले की सच्चाई काफी हद तक डीएनए रिपोर्ट, वैज्ञानिक जांच और न्यायालय की निगरानी में चल रही आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

नोट: यह समाचार न्यायालयीन कार्यवाही व उपलब्ध तथ्यों पर आधारित केस स्टडी है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट व अदालत के निर्णय पर निर्भर होंगे।

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