दिल्ली : पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े एक वीडियो को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित वीडियो को इंटरनेट से हटाने का निर्देश दिया है।

वीडियो के प्रसार पर अदालत की गंभीर टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसका सोशल मीडिया पर प्रसार नियमों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री को बिना अनुमति सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

कई राजनीतिक और मीडिया हस्तियों को नोटिस
इस मामले में अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और पत्रकार रवीश कुमार को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई की तारीख 6 जुलाई तय की गई है।

वीडियो अपलोड और राजनीतिक एंगल पर बहस
याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि वीडियो को चुनिंदा हिस्सों में प्रसारित किया गया ताकि राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाया जा सके। वकील ने इसे अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास बताया।

मेटा और गूगल ने तकनीकी सीमाएं बताईं
सुनवाई के दौरान मेटा और गूगल की ओर से कहा गया कि किसी वीडियो के सबसे पहले अपलोडर की पहचान करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। हालांकि आईपी लॉग और अन्य डेटा के जरिए कुछ हद तक ट्रेसिंग की जा सकती है।

पहले से कई लिंक हटाए गए
गूगल ने बताया कि संबंधित 13 URL पहले ही हटाए जा चुके हैं। वहीं मेटा ने कहा कि आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्ट मिलने पर उसे हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

अदालत की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने सवाल उठाया कि अवैध सामग्री सामने आने पर प्लेटफॉर्म्स को कार्रवाई के लिए आदेश का इंतजार क्यों करना पड़ता है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई में सभी पक्ष विस्तृत जानकारी के साथ पेश हों।

मामले में अगली सुनवाई 6 जुलाई को
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी सामग्री को प्रसारित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस मामले की आगे की सुनवाई में विस्तृत निर्देश दिए जाएंगे।

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