अम्बिकापुर: आत्मा योजनांतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), अजीरमा, जिला सरगुजा में एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में क्षेत्र के 27 प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों ने किसानों को आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों, कम वर्षा की स्थिति में खेती के प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की।

परिचर्चा को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा तथा वैज्ञानिक श्री पांडु राम पैकरा ने अलनीनो के संभावित प्रभाव एवं कम वर्षा की परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को कम अवधि एवं कम पानी में तैयार होने वाली फसलों एवं उन्नत किस्मों का चयन करने, जल संरक्षण की तकनीकों को अपनाने तथा कतारबद्ध बुवाई करने की सलाह दी। साथ ही सुगंधित धान की उन्नत खेती, उसकी गुणवत्ता एवं बाजार में उपलब्ध बेहतर मूल्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों  प्रभात प्रधान,  विनोद पैकरा,  राकेश कर्नल,  रामजन तथा  शैलेन्द्र लाल ने किसानों को खरीफ सीजन की पूर्व तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसून आगमन से पूर्व खेतों की गहरी जुताई करने से खरपतवार एवं कीटों का प्रभाव कम होता है तथा मिट्टी में नमी संरक्षण बेहतर होता है। अधिकारियों ने किसानों को फसलों में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों के जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग पर विशेष बल दिया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और खेती की लागत में कमी आए।

परिचर्चा के दौरान किसानों ने खेती से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनका वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समाधान किया गया। कार्यक्रम से किसानों ने खरीफ फसल प्रबंधन, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों की उपयोगी जानकारी प्राप्त की और इसे अपने खेतों में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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