

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में किराना व्यवसायी गिरीश यादव के चर्चित अपहरण मामले का पुलिस ने महज तीन दिनों में खुलासा कर दिया है। जीपीएम पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में अपहृत व्यवसायी को ओडिशा के कोरापुट से सकुशल मुक्त कराया गया, जबकि अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में फिरौती, अवैध कारोबार और संगठित आपराधिक नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।
घर के बाहर से दिनदहाड़े किया गया था अपहरण
पुलिस के अनुसार, मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम उषाढ़ निवासी गिरीश यादव का उनके घर के सामने से दिनदहाड़े अपहरण किया गया था। वारदात के समय परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। कार सवार बदमाश जबरन उन्हें अपने साथ ले गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिससे जांच को अहम सुराग मिले।
साइबर ट्रैकिंग से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
घटना के तुरंत बाद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। मोबाइल लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। इसी आधार पर पुलिस अपहृत व्यवसायी तक पहुंचने और आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने में सफल रही।
ओडिशा के कोरापुट से सुरक्षित बरामद हुआ व्यापारी
मिले इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में दबिश दी, जहां से गिरीश यादव को सुरक्षित मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिनके अलग-अलग राज्यों से संबंध होने की जानकारी सामने आई है।
20 लाख की फिरौती मांगने का आरोप
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि अपहरण के बाद आरोपियों ने व्यवसायी के परिजनों से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अपहरण की साजिश कब बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे।
गांजा तस्करी से जुड़े एंगल की भी जांच
पुलिस को जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि यह मामला अवैध गांजा कारोबार और उससे जुड़े लेनदेन से भी जुड़ा हो सकता है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की पड़ताल के बाद ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
हथियार, कारतूस और फर्जी पुलिस वाहन जब्त
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन और नीली बत्ती तथा 'पुलिस' लिखी स्कॉर्पियो-एन जब्त की है। आशंका है कि आरोपी इसी वाहन का इस्तेमाल वारदात को अंजाम देने और लोगों को भ्रमित करने के लिए करते थे।
जेल में हुई थी गिरोह की पहचान
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि कानपुर जेल में बंद रहने के दौरान इनकी आपस में पहचान हुई थी। वहीं से इन लोगों ने संगठित होकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने की योजना बनानी शुरू की।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया है। वहीं गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।





















