

बालोद। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बालोद जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान को तेज कर दिया है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले के सभी नागरिकों से इस जन अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने और टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास और समय पर उपचार के जरिए ही जिले को क्षय रोग से पूरी तरह मुक्त बनाया जा सकता है।
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी को हल्के में न लें, ये हो सकते हैं टीबी के संकेत
कलेक्टर ने नागरिकों को आगाह करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी बनी रहे, शाम के समय बुखार आए, अचानक वजन कम होने लगे या भूख न लगे, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संकेत टीबी की ओर इशारा कर सकते हैं, इसलिए बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा
कलेक्टर ने बताया कि बालोद जिले के सभी शासकीय अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। बलगम जांच और आधुनिक सीबीनाट टेस्ट जैसी सुविधाएं भी सरकारी अस्पतालों में बिना किसी शुल्क के कराई जा रही हैं, जिससे समय पर बीमारी की पहचान और इलाज संभव हो सके।
'निक्षय मित्र' बनकर टीबी मरीजों की मदद करने की अपील
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने समाज के सक्षम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से 'निक्षय मित्र' के रूप में पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लिया जा सकता है और उन्हें पौष्टिक आहार किट के साथ मानसिक सहयोग भी दिया जा सकता है। इससे मरीजों के जल्दी स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
टीबी मरीजों से भेदभाव नहीं, सहयोग और नियमित इलाज के लिए करें प्रेरित
कलेक्टर ने लोगों से टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या सामाजिक दूरी नहीं बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से दवा लेने और इलाज पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित करना ही टीबी मुक्त समाज की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।





















