

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ऐसे 23 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन पर साइबर ठगों को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाकर असली अपराधियों तक ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
'म्यूल अकाउंट' के जरिए चल रहा था पूरा खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के बदले अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को इस्तेमाल करने के लिए देते थे। ऐसे खातों को 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन किया जाता था, जिससे असली साइबर गिरोह तक पुलिस की पहुंच मुश्किल हो जाती थी।
15 हिरासत में, 8 को नोटिस देकर छोड़ा गया
छावनी थाना क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 15 आरोपियों को हिरासत में लिया, जबकि 8 लोगों को नोटिस जारी कर छोड़ दिया गया। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड समेत बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
तकनीकी जांच से खुला पूरा नेटवर्क
पुलिस ने बैंक खातों के लेनदेन, तकनीकी इनपुट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच में पुष्टि हुई कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम पहले इन म्यूल अकाउंट्स में जमा की जाती थी। इसके बाद आरोपी अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे, ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।
पूछताछ में किया अहम खुलासा
29 जून को हुई कार्रवाई के दौरान पकड़े गए कई आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे गिरोह तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है।
पुलिस की चेतावनी
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग संबंधी दस्तावेज इस्तेमाल करने के लिए न दें। ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।









