
बिलासपुर हाईकोर्ट के 28 जुलाई के आदेश को चुनौती दी गई थी; आपराधिक प्रकरण का ट्रायल जारी रहेगा
दिल्ली/बिलासपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से जुड़े करुण डहरिया के आपराधिक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। करुण डहरिया की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के 28 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई स्पेशल लीव पिटीशन (क्रिमिनल) क्रमांक 15137/2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2026 को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पीठ हाईकोर्ट के चुनौती दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं थी। इसके बाद एसएलपी खारिज कर दी गई और लंबित आवेदन, यदि कोई हों, भी निस्तारित कर दिए गए। हालांकि, इस आदेश का अर्थ करुण डहरिया को मामले में दोषी ठहराया जाना नहीं है। मूल आपराधिक प्रकरण की सुनवाई कानून के अनुसार संबंधित ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
15 फरवरी की घटना के बाद हुई गिरफ्तारी..
मामला थाना करौंधा में दर्ज अपराध क्रमांक 03/2026 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार 15 फरवरी 2026 की रात करीब 9 बजे अवैध बॉक्साइट खनन एवं परिवहन को लेकर विवाद के दौरान राम उर्फ रामनरेश, अजीत राम और आकाश अगरिया के साथ मारपीट हुई थी। आरोप है कि इस घटना में राम उर्फ रामनरेश गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई।
घटना के अगले दिन 16 फरवरी 2026 को पुलिस ने करुण डहरिया को गिरफ्तार किया। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद 14 मई 2026 को आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। प्रकरण आगे चलकर विशेष सत्र प्रकरण (एसटी-एट्रोसिटीज) क्रमांक 13/2026 के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, एससी-एसटी अधिनियम, रामानुजगंज के न्यायालय में विचाराधीन है।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2), 3(5), 109(1), 296 एवं 238 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप हैं।
ट्रायल को दूसरे जिले में स्थानांतरित करने की मांग
करुण डहरिया ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में टीपीसीआर क्रमांक 10/2026 दाखिल कर विशेष सत्र प्रकरण को बलरामपुर - रामानुजगंज जिले से बाहर किसी अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
याचिका में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं। इनमें दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, सुनवाई की गति, गवाहों की सुरक्षा तथा न्यायालय की कथित टिप्पणियों सहित अन्य आधारों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से यह आशंका जताई गई थी कि वर्तमान न्यायालय में निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी।
हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक मुकदमे के स्थानांतरण के लिए केवल व्यक्तिगत अथवा व्यक्तिपरक आशंका पर्याप्त नहीं है। इसके लिए वास्तविक, उचित और सद्भावनापूर्ण आशंका अथवा ऐसे वस्तुनिष्ठ आधार होना जरूरी है, जिनसे न्याय न मिलने की वास्तविक संभावना स्थापित हो। हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित न्यायाधीश की टिप्पणियों के आधार पर स्थानांतरण के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट..
28 जुलाई के हाईकोर्ट आदेश के बाद करुण डहरिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (सीआर एल) क्रमांक 15137/2026 दाखिल की गई। इस याचिका में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
22 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद पीठ ने स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट के चुनौती दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। इसके साथ ही SLP खारिज कर दी गई।इसका सीधा प्रभाव यह है कि हाईकोर्ट का 28 जुलाई का आदेश बरकरार रहा और मुकदमे को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग स्वीकार नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मतलब दोषसिद्धि नहीं..
कानूनी रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज किए जाने को करुण डहरिया के खिलाफ आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती हाईकोर्ट के स्थानांतरण संबंधी आदेश को लेकर थी।अर्थात सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया है। इससे मूल आपराधिक मुकदमा समाप्त नहीं हुआ है और न ही इस आदेश से करुण डहरिया को अपराध का दोषी घोषित किया गया है। वे मामले में आरोपी हैं और उनका दोष या निर्दोषता ट्रायल के दौरान साक्ष्यों एवं कानून के आधार पर संबंधित न्यायालय द्वारा तय की जानी है।
अब आगे क्या होगा..?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज होने के बाद विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 13/2026 की कार्यवाही अपने मौजूदा न्यायालय में कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी। हाईकोर्ट ने भी अपने 28 जुलाई के आदेश में संबंधित ट्रायल कोर्ट से कानून, न्यायिक गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखते हुए कार्यवाही आगे बढ़ाने की अपेक्षा व्यक्त की थी।इस प्रकार 15 फरवरी की कथित मारपीट की घटना से शुरू हुआ मामला गिरफ्तारी, पुलिस विवेचना और 14 मई को आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ट्रायल कोर्ट पहुंचा। निष्पक्ष सुनवाई की आशंका जताते हुए करुण डहरिया ने हाईकोर्ट में प्रकरण स्थानांतरण की मांग की, जिसे 28 जुलाई को खारिज कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन 22 अगस्त को एसएलपी खारिज होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ। अब मूल आपराधिक प्रकरण की न्यायिक प्रक्रिया संबंधित ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।




















