

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की प्राकृतिक वादियों में स्थित प्रदेश की सबसे ऊंची पर्वत चोटी गौरलाटा पीक एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी क्षण की साक्षी बनी, जब महाराष्ट्र के मुंबई की नन्हीं पर्वतारोही ग्रिहिता विचारे ने कठिन परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए सफलतापूर्वक गौरलाटा पीक फतह कर ली। कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा चुकी ग्रिहिता ने इस अभियान के माध्यम से “बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ” का सशक्त संदेश भी दिया।
घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच पूरा किया गया यह अभियान साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति का जीवंत उदाहरण बन गया। गौरलाटा की ऊंचाइयों पर पहुंचकर ग्रिहिता ने तिरंगा लहराया और बेटियों के सम्मान, शिक्षा एवं सशक्तिकरण का संदेश दिया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल क्षेत्रवासियों बल्कि पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
ग्रिहिता अपने पिता सचिन विचारे के साथ इस विशेष अभियान पर पहुंचीं थीं। पिता-पुत्री की यह जोड़ी लगातार साहसिक अभियानों में भाग लेकर नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है। बताया जा रहा है कि कम उम्र में ही ग्रिहिता कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप, माउंट किलिमंजारो तथा माउंट किनाबालु जैसी विश्व प्रसिद्ध चोटियों पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इतनी कम उम्र में इन कठिन अभियानों को पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गौरलाटा अभियान के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी ग्रिहिता का उत्साहवर्धन किया। सरपंच संघ के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने उनका आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में देश और समाज का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रिहिता जैसी प्रतिभाएं युवाओं में साहस, अनुशासन, सकारात्मक सोच और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ग्रिहिता विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहराकर देश का गौरव बढ़ाएंगी।
अभियान के दौरान स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार इतनी कम उम्र की पर्वतारोही को गौरलाटा जैसे दुर्गम क्षेत्र में सफलता हासिल करते देख क्षेत्र के बच्चों और युवाओं में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। लोगों का मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन ऐसे साहसिक अभियानों को बढ़ावा दे, तो बलरामपुर जिले के पर्वतीय पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
ग्रिहिता की इस उपलब्धि को केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है। “बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ” का संदेश लेकर पहाड़ों की ऊंचाइयों तक पहुंची ग्रिहिता आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती।
ग्रिहिता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्र के सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं और पर्वतारोहण प्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।





















