नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही युद्धविराम की बातचीत पूरी तरह ठप पड़ गई है। दोनों देश अपने-अपने अहम मुद्दों पर अड़े हुए हैं और किसी भी तरह का समझौता नहीं हो पा रहा है। परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलें, प्रतिबंधों में राहत और हार्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण जैसे बड़े मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है। इस वजह से संघर्ष जारी है और कोई तुरंत समाधान नजर नहीं आ रहा।

दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। अमेरिका ईरान से कई बड़े बदलाव चाहता है, जबकि ईरान अमेरिका की मांगों को मानने को तैयार नहीं दिख रहा। इस अड़चन की वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

अमेरिका क्या चाहता है?

अमेरिका ईरान से सबसे पहले उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहा है। साथ ही यूरेनियम संवर्धन को तुरंत रोकने पर जोर दिया गया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर सख्त पाबंदियां स्वीकार करे।

इसके अलावा, हार्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक शिपिंग के लिए पूरी तरह खुला रखने की मांग है ताकि तेल की आपूर्ति बाधित न हो। अमेरिका ईरान से क्षेत्रीय मिलिशिया गुटों को समर्थन बंद करने को भी कह रहा है। इन सभी मुद्दों पर अमेरिका का रुख बहुत सख्त है और वह ईरान से इनका पालन करने की उम्मीद रखता है।

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