


सूरजपुर: जमीनी हकीकत सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत रामपुर में पूरी तरह से उजागर हो गई है। वर्षों से जिले में कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत सीईओ जैसे शीर्ष अधिकारी बदलते रहे, पंचायत में सरपंच और पंचों के चुनाव भी हुए, लेकिन पंचायत भवन में लगा सूचना पटल आज भी अतीत में कैद है। सूचना पटल पर न तो वर्तमान जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज हैं और न ही अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पंचायत में वर्तमान सरपंच, पंच और अन्य प्रतिनिधि पद पर आसीन होने के बावजूद उनके नाम सूचना पटल पर दर्ज नहीं किए गए हैं। इसके बजाय पुराने प्रतिनिधियों के नाम अब भी जस के तस लिखे हुए हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीणों के सूचना के अधिकार का भी सीधा उल्लंघन है। पंचायत सूचना पटल का उद्देश्य जनता को यह बताना होता है कि उनके निर्वाचित प्रतिनिधि कौन हैं और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसके पास है, लेकिन यहां यह व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है।

गौरतलब है कि पंचायत सचिव पर सूचना पटल के संधारण और अद्यतन की सीधी जिम्मेदारी होती है। इसके बावजूद यह लापरवाही वर्षों से बनी हुई है। सवाल यह भी उठता है कि जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर होने वाले निरीक्षण आखिर किस कागज पर सीमित रह गए। क्या यह लापरवाही जानबूझकर बरती जा रही है या फिर जवाबदेही की व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो चुकी है?
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जब लोकतंत्र और संविधान की बात की जाती है, उसी दिन ग्राम पंचायत में लोकतांत्रिक व्यवस्था का यह हाल चिंताजनक है। प्रशासनिक उदासीनता का यह उदाहरण बताता है कि निचले स्तर पर नियम-कानून कितने कमजोर हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हैं या फिर ग्राम पंचायत रामपुर का सूचना पटल यूं ही सिस्टम की असंवेदनशीलता का प्रतीक बना रहेगा।
इस संबंध में पंचायत सचिव का कहना है जल्दी ही पेटिंग व सुधार कार्य कराया जाएगा।































