बंगाल में तेज हुआ चुनावी प्रचार

Bengal elections 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति और प्रचार अभियान को तेज कर चुके हैं, लेकिन इस बीच कांग्रेस को जमीनी स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

अकेले चुनाव लड़ रही कांग्रेस, लेकिन संगठन कमजोर

इस बार कांग्रेस राज्य में अकेले चुनाव मैदान में उतरी है। पार्टी कई सीटों पर उम्मीदवार भी उतार चुकी है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या प्रचार तंत्र और कार्यकर्ताओं की कमी बनी हुई है। यही कारण है कि चुनावी अभियान को आगे बढ़ाना पार्टी के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

दशकों से कमजोर होता संगठन

कांग्रेस की स्थिति राज्य में लंबे समय से कमजोर बनी हुई है। 1972 के बाद से पार्टी को लगातार गिरावट का सामना करना पड़ा है। उस दौर में कांग्रेस ने करीब 200 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इसके बाद स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

हाल के चुनावों में लगातार गिरावट

2011 और 2016 के चुनावों में कांग्रेस ने कुछ सीटों पर सफलता जरूर हासिल की थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वह खाता तक नहीं खोल पाई।

इस बार गढ़ों पर फोकस

इस बार कांग्रेस का फोकस अपने पारंपरिक क्षेत्रों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर पर है। पार्टी को उम्मीद है कि सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने से उसका वोट प्रतिशत बढ़ सकता है।

कार्यकर्ता संकट बना सबसे बड़ी चुनौती

कांग्रेस नेताओं के अनुसार सबसे बड़ी समस्या जमीनी कार्यकर्ताओं की कमी है। पार्टी के पास न तो मजबूत संगठनात्मक ढांचा है और न ही प्रचार के लिए पर्याप्त कार्यकर्ता। इसी वजह से चुनावी वादों को जनता तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है।

नेतृत्व भी मान रहा है चुनौती

वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी भी पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि राज्य में संगठन कमजोर है और चुनाव आसान नहीं होगा।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!