वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी. इसके बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, कुछ मामलों में यह 500 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को झकझोर देने वाला बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आ गए हैं।

ट्रंप ने एक ऐसे विवादित विधेयक को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध बना वजह

यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका की सख्त रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने साफ कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। इसी को रोकने के लिए अमेरिका अब टैरिफ को हथियार बनाने की तैयारी में है।

अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक अच्छी रही और इस बिल पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग हो सकती है.

रूस से तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई
यह बिल लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है. इसके तहत ऐसे देशों पर सख्ती की जा सकेगी जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम खरीद रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग जारी रखने के लिए पैसा मिलता है.

भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव
सीनेटर ग्राहम के मुताबिक, इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें. पिछले साल ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी टैक्स लगाया था. इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया. इससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया और दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई.

चीन के साथ भी बिगड़े रिश्ते
अमेरिका और चीन के बीच भी टैक्स को लेकर तनाव बढ़ चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया था. हालांकि, बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे 90 दिनों के लिए अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे. समझौते के अनुसार, अमेरिका चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करेगा. वहीं चीन अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर देगा.

भारत को लेकर ट्रंप का बयान
हाल के दिनों में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि भारत पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा, ‘पीएम मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मुझे खुश रखना जरूरी था. हम बहुत जल्दी टैक्स बढ़ा सकते हैं.’

चावल पर भी टैक्स की चेतावनी
पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बात तब सामने आई, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचने का आरोप लगाया.

अटकी हुई है बातचीत 
भारत और अमेरिका के बीच टैक्स को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है. अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स कम करे. वहीं भारत सरकार साफ कह चुकी है कि वह अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी.

किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

भारत – फिलहाल भारत पर अमेरिका का करीब 50% तक टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर सीधे 500% करने का प्रस्ताव है।

चीन – पहले से जारी अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच यह फैसला तनाव को और बढ़ा सकता है।

ब्राजील – लैटिन अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील को भी भारी आर्थिक झटका लग सकता है।
लिंडसे ग्राहम का बयान

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसका मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित करना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।’

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