सूरजपुर: सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत रामनगर के सामुदायिक भवन में महान आदिवासी योद्धा शहीद वीर गुंडाधुर की 116वीं भूमकाल स्मृति दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ वीर गुंडाधुर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बी.पी.एस. पोया ने वीर गुंडाधुर के संघर्ष, साहस और नेतृत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1910 में बस्तर क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह का नेतृत्व वीर गुंडाधुर ने किया था, जो अंग्रेजों की दमनकारी वन नीतियों के खिलाफ एक संगठित आंदोलन था।

पोया ने कहा कि इस विद्रोह के माध्यम से आदिवासी समाज ने अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी। वीर गुंडाधुर के नेतृत्व में आदिवासी इतने संगठित हो गए थे कि अंग्रेज अधिकारी उनके नाम से भी भयभीत रहते थे। यह आंदोलन बस्तर के जंगलों से निकलकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के वन क्षेत्रों तक फैल गया।

उन्होंने वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी उद्योगपतियों और कुछ सरकारी नीतियों के कारण आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, जिससे विस्थापन, गरीबी और सांस्कृतिक क्षरण जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वीर गुंडाधुर के आदर्शों को अपनाकर एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करें।

बी.पी.एस. पोया ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की कि शहीद वीर गुंडाधुर के नाम पर योजनाएं, चौक-चौराहे, कॉलेज, विश्वविद्यालय एवं अस्पताल स्थापित किए जाएं और राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उनके जीवन संघर्ष को शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके बलिदान से परिचित हो सके।

उन्होंने समाज से गोटूल परंपरा को पुनर्जीवित करने की अपील करते हुए कहा कि यह हमारे पूर्वजों की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक व्यवस्था का मजबूत आधार रही है। “मावा नाटे, मावा राज” की भावना को जीवित रखने के लिए अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन जरूरी है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में संतोष पावले,आनंद सिंह, विपेंद्र कोर्राम, दीपक उइके, गुरुदयाल उइके, जयसिंह उइके, शोभनाथ उइके, हीरालाल प्रजापति तथा ग्राम पंचायत रामनगर की सरपंच  संगीता रोहित, सचिव ध्रुवेंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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