


नई दिल्ली। पश्चिमी संसद के सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण का आगाज ही सियासी पारे में इजाफे के साथ होगा जब लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरूआत होगी। बिरला पर सदन के संचालन में गंभीर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने सत्र के पहले चरण में ही उनके खिलाफ अविश्वास का यह प्रस्ताव दिया था।
संसद में सियासी गरमागरमी की दूसरी प्रमुख
अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदने की भारत को इजाजत देने की अमेरिका की घोषणा है। विपक्षी दल अमेरिका के इस एलान को देश की रणनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए मोदी सरकार पर हमलवार हैं और साफ तौर पर इस मामले को संसद में उठाने की घोषणा की है।
इसी तरह पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु में चुनाव आयोग के विवादित विशेष सघन पुनरीक्षण के दौरान लाखों वोटरों के नाम काटे जाने का मामला भी विपक्षी दलों के लिए अहम है। तृणमूल कांग्रेस से लेकर द्रमुक जैसी पार्टियां भाजपा के इशारे पर लाखों की संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटने का अभियान संचालित करने का चुनाव आयोग पर आरोप लगा रही हैं।
































