ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नाक के इलाज में कथित लापरवाही को लेकर डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई हुई है। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए मरीज को मुआवजा देने का आदेश दिया है। वहीं पीड़ित ने करीब 49.56 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की है।


क्या है पूरा मामला

मामला तब शुरू हुआ जब ग्वालियर निवासी रवि खंडेलवाल को 1 फरवरी 2022 को नाक से खून आने की समस्या हुई। इलाज के लिए उन्होंने सत्यम ईएनटी केयर सेंटर के संचालक डॉ. रविंद्र बंसल से संपर्क किया।

डॉक्टर ने जांच के बाद एंडोस्कोपी और कॉटराइजेशन प्रक्रिया की, लेकिन इसके बावजूद मरीज को राहत नहीं मिली। समय के साथ उनकी परेशानी और बढ़ती गई। नाक में सूजन, दर्द और ब्लॉकेज की समस्या गंभीर होती चली गई, जबकि इलाज जारी रहा।


दूसरी राय में सामने आई गंभीर बीमारी

स्थिति बिगड़ने पर मरीज ने अन्य विशेषज्ञों से परामर्श लिया। जांच में सामने आया कि उन्हें सेप्टल एब्सेस हो गया है, जो नाक के भीतर संक्रमण की गंभीर स्थिति होती है।

समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण नाक की कार्टिलेज प्रभावित हो गई, जिससे सांस लेने में भी कठिनाई होने लगी। इस स्थिति को मरीज ने अपनी स्थायी शारीरिक क्षति बताया है।


आयोग का फैसला क्या कहता है

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने सभी दस्तावेज और चिकित्सा रिकॉर्ड का गहराई से परीक्षण किया। आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने माना कि इलाज मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था।

निर्णय में कहा गया कि सही समय पर उचित उपचार न मिलने से मरीज को स्थायी नुकसान पहुंचा। इसके आधार पर आयोग ने डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 1 लाख रुपये मुआवजा 45 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया।


डॉक्टर ने आरोपों को नकारा

दूसरी ओर, डॉ. रविंद्र बंसल ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने इलाज तय मानकों के अनुसार ही किया और किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती।


मामला क्यों है अहम

यह फैसला मेडिकल लापरवाही के मामलों में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इलाज में थोड़ी सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है और जिम्मेदारी तय होने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!