सूत्र/बलरामपुर।आखिरकार जिले में असली ‘विकास पुरुष’ का नाम सामने आ गया। नाम है श्री यादव जी, महज एक कर्मचारी, कागजों पर साधारण, लेकिन हकीकत में जिले का ‘सुपर सीएम’। नरेगा हो या डीएमएफ, करोड़ों-करोड़ों के निर्माण कार्य- सब कुछ उनकी ‘अनुशंसा’ के बिना एक ईंट भी नहीं हिल सकती। पंचायतों में खुलकर चर्चा  हैं कमीशन का सिलसिला इतना जोरों पर है कि लगता है जिले का पूरा बजट अब श्री यादव जी की जेब से ही निकलता है।
बड़े-बड़े नेता तो बस उनके संरक्षण में हैं। जिले के सभी अधिकारी उनके निर्देश पर नाचते हैं। सब उनके इशारे पर स्वीकृति देते हैं। नरेगा योजना में करोड़ स्वीकृत हुए ? श्री यादव जी की कृपा। डीएमएफ फंड की बारी आई? फिर वही ‘मार्गदर्शन’। लोग हँस-हँसकर कह रहे हैं- भाई, चुनाव में नेता जीते थे, लेकिन सत्ता तो श्री यादव जी के पास है। एक कर्मचारी जिसके बिना जिले में कोई विकास नहीं हो सकता, वो विकास का मालिक बन गया। क्या मजा है! लोकतंत्र में हमने सुना था कि जनता सर्वोच्च है, लेकिन बलरामपुर ने नया फॉर्मूला खोज लिया ‘कर्मचारी सर्वोच्च है’। बस थोड़ा पहुंचदार होना चाहिए, थोड़े बड़े नेता का हाथ चाहिए और फिर देखो सभी लोग आपकी जेब में। ठेकेदार तो सीधे कहते हैं- “श्री यादव जी की अनुशंसा के बिना फाइल आगे नहीं बढ़ती।” मतलब जिले का हर विकास कार्य अब उनकी ‘मर्जी’ से ही होता है। जनता तमाशा देख रही है। नेता चुप, प्रशासन चुप, सिर्फ विकास कार्य श्री यादव जी के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सचमुच बलरामपुर ने साबित कर दिया कि आज के युग में असली ताकत ‘कर्मचारी’ के पास होती है वो भी जब वो थोड़ा ‘पहुंचदार’ हो जाए। बहुत जल्द लाखों रुपए का घोटाला पाठकों के सामने आएगा।

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